घर परिवार
छोटे लम्हे, बड़ी सीख (8)
डॉ रीटा अरोड़ा
1. माँ का दुलार
माँ ने सिर पर हाथ फेरा – “थक गया होगा।”
थकान सच में उतर गई।
सीख: कुछ स्पर्श दवा से ज्यादा असर करते हैं।
2. पोते का सवाल
पोता – “दादा, आप बूढ़े हो गए?”
दादा हँसे – “थोड़ा सा।”
सीख: उम्र बढ़ती है, दिल नहीं।
3. दोस्त की कॉल
अचानक फोन आया-“बस ऐसे ही याद आ गया।”
मन हल्का हो गया।
सीख: सच्चे दोस्त वजह नहीं ढूंढते।
4. माँ-बेटी का आईना
बेटी ने आईने में खुद को देखा – “आप जैसी लग रही हूँ।”
माँ मुस्कुरा दी।
सीख: कुछ रिश्ते वक्त के साथ खुद में झलकते हैं।
5. दोस्त की डाँट
दोस्त – “खुद का ख्याल रख!”
वो हँसा – “तू है ना।”
सीख: सच्ची दोस्ती में डाँट भी प्यार होती है।
6. बहू की मुस्कान
बहू ने कहा-“आज सब खुश हैं।”
सास बोली-“तुम हो इसलिए।”
सीख: घर की खुशी, रिश्तों से बनती है।
7. दोस्त का कंधा
दोस्त – “बता क्या हुआ?”
वो – “कुछ नहीं… बस बैठ।”
सीख: हर दर्द को शब्द नहीं चाहिए।
8. बहन की याद
बहन – “याद है हमारी लड़ाई?”
भाई – “नहीं… बस तू याद है।”
सीख: रिश्ते लड़ाई से नहीं टूटते।
