लघुकथा
एक और मौत
अनीश
गाँव में हत्या हुई थी। सबने देखा था—किसने मारा, कैसे मारा। लेकिन सब जानते थे कि हत्यारा बड़ा रसूख़ वाला आदमी है। पुलिस, क़ानून और अदालत—सब उसके लिए सिर्फ़ रास्ते हैं। पुलिस आई और थानेदार ने चौपाल पर खड़े होकर पूछा, “कोई गवाह है?” गाँव में गहरी चुप्पी पसर गई। काफ़ी देर बाद एक बूढ़ा बोला, “साहब, हमने सब देखा था… पर हम गवाही नहीं देंगे।” थानेदार ने हैरानी से पूछा, “क्यों?” बूढ़ा धीरे से बोला, “क्योंकि एक मौत तो हो ही चुकी है… हम नहीं चाहते कि एक मौत और हो – सच की मौत वो भी क़ानून के हाथों।”
