बात बेबात
भारतीय मीडिया का वैश्विक युद्ध कौशल
विजय शंकर पांडेय
अमेरिकी पेंटागन ने भी भारतीय टीवी एंकरों के विश्लेषण को लेकर एक आपात बैठक की। एक अधिकारी ने कहा—“हमारे पास सैटेलाइट है, ड्रोन है, लेकिन इतनी पक्की जानकारी नहीं जितनी रात 9 बजे भारतीय चैनलों पर मिल जाती है।”
उधर, ईरान की खुफिया एजेंसी इस समय दो मोर्चों पर काम कर रही है। एक, मिसाइल हमलों का जवाब देना। दूसरा, यह पता लगाना कि आखिर उसकी असली जन्म कुंडली न्यूज एंकर विचित्रा त्रिपाठी तक पहुंची कैसे? तेहरान में विशेषज्ञों की एक विशेष टीम बनाई गई है, जो यह समझने की कोशिश कर रही है कि “मंगल दोष” के कारण युद्ध बढ़ा या “राहु की दशा” के कारण।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय मीडिया की कालजयी पत्रकारिता से दुनिया पहले ही परिचित हो चुकी थी। अब हाल यह है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान—तीनों पक्ष युद्ध से कम और भारतीय न्यूज चैनलों से ज्यादा परेशान हैं।
इस बीच BARC रिपोर्ट आई कि सनसनीखेज कवरेज और संभावित घबराहट के कारण भारत सरकार ने चार हफ्तों तक TRP जारी करने पर रोक लगा दी है। सूत्र बताते हैं कि यह फैसला इसलिए लिया गया, क्योंकि कुछ चैनलों ने पहले ही “विश्व युद्ध – एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट” चला दी थी, जबकि दुनिया अभी प्रस्तावना पढ़ ही रही थी।
कुल मिलाकर युद्ध भले पश्चिम एशिया में हो, लेकिन उसकी असली कमेंट्री स्टूडियो में ही लड़ी जा रही है। और वहां मिसाइल से ज्यादा तेज़ चलती है—“ब्रेकिंग न्यूज़”।
