सामाजिक सरोकार
छोटे लम्हे, बड़ी सीख (7)
डॉ रीटा अरोड़ा
1.अनसुना गाना
पिता ने रेडियो चलाया।
पिता-“ये मेरा पसंदीदा गाना है…”
किसी बच्चे ने जवाब नहीं दिया। सबने इयरफ़ोन लगा रखे थे।
सीख: साझा पल ही संगीत को यादगार बनाते हैं।
2. खामोश खाना
घर में सब मोबाइल में व्यस्त थे, माँ ने चुपचाप खाना परोस दिया।
किसी ने कहा भी नहीं-“आप भी बैठो।”
सीख: रिश्ते साथ बैठने से बनते हैं, सिर्फ साथ रहने से नहीं।
3. माँ-बेटी की बात
बेटी-“आप समझती नहीं हो।”
माँ मुस्कुरा दी-“समझती हूँ, बस कहती नहीं।”
सीख: माँ सब समझती है, बस जताती कम है।
4. दोस्त का साथ
दोस्त-“चल, बाहर चलते हैं।”
वो बोला-“मन नहीं है।”
दोस्त-“इसलिए तो चल।”
सीख: सच्चे दोस्त आपको आपसे बेहतर जानते हैं।
5. दादा का इंतज़ार
दादा दरवाज़े पर बैठे थे-“आज आएगा ना?”
बच्चा नहीं आ पाया।
सीख: बुज़ुर्गों के दिन, अपनों के इंतज़ार में गुजरते हैं।
6. नानी की रोटी
नानी ने पूछा-“और खाएगा?”
बच्चा बोला-“नहीं।”
फिर भी एक और रख दी।
सीख: नानी का प्यार कभी कम नहीं होता।
7. पुरानी दोस्ती
दोस्त-“तू नहीं बदला।”
वो हँसा-“तेरे लिए नहीं।”
सीख: सच्चे रिश्ते वक्त से नहीं बदलते।
8. पोती का सवाल
पोती-“दादी, आप मुझे इतना प्यार क्यों करती हो?”
दादी-“क्योंकि तू मेरी मुस्कान है।”
सीख: कुछ रिश्ते वजह नहीं ढूंढते।
