चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का माकपा को संदेश : भारत-चीन संबंधों में सुधार दोनों देशों के हित में

माकपा के सम्मेलन के लिए दुनियाभर के वामपंथी दलों ने दीं शुभकामनाएं

मदुरै। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को भेजे संदेश में कहा है कि भारत-चीन संबंधों में सुधार दोनों देशों और क्षेत्र के हित में है। सीपीसी ने इसी के साथ मदुरै में आयोजित माकपा के सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) द्वारा साझा किए गए एक दस्तावेज के अनुसार, दुनिया भर की 34 वामपंथी पार्टियों ने उसे 24वीं पार्टी कांग्रेस (सम्मेलन) की सफलता के लिए शुभकामना संदेश भेजे हैं।

सीपीसी के अलावा़, कोरिया की वर्कर्स पार्टी, वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी, क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी, ऑस्ट्रेलिया की कम्युनिस्ट पार्टी, बेल्जियम की वर्कर्स पार्टी, फलस्तीनी पीपुल्स पार्टी और अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी की कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी माकपा को शुभकामना संदेश भेजे हैं।

सीपीसी ने अपने संदेश में कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में, चीन-भारत संबंधों में सुधार दोनों देशों और क्षेत्र के साझा हित में है। उसने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और विश्व व्यवस्था अब परिवर्तन के एक नए दौर में है। चीन-भारत संबंधों में सुधार दोनों देशों और क्षेत्र के साझा हितों को पूरा करता है।’’

सीपीसी ने दोनों दलों के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान को रेखांकित करते हुए कहा कि वह चीन-भारत संबंधों की निरंतर प्रगति तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए माकपा और अन्य भारतीय राजनीतिक दलों के साथ आदान-प्रदान और रणनीतिक संवाद को मजबूत करने तथा पार्टी और राज्य शासन के अनुभव को साझा करने के लिए तैयार है।

माकपा के अंतरिम समन्वयक प्रकाश करात ने हाल ही में एक साक्षात्कार में गठबंधन सहयोगी बने बिना चीन के साथ संबंध सुधारने की वकालत करते हुए कहा था कि इससे बहुध्रुवीय विश्व में भारत की स्थिति में सुधार होगा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति काल के दौरान आने वाली चुनौतियों में संतुलन स्थापित होगा।

बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीबी) ने अपने संदेश में दावा किया कि ‘‘हिंदुत्व अभियान की निरंतर आक्रामकता’’ और ‘‘मुस्लिम अल्पसंख्यकों को लक्षित करके विभिन्न कानूनों को पारित करना भारतीय संविधान के संघीय चरित्र का स्पष्ट उल्लंघन है और भारत में सांप्रदायिक सद्भाव को भारी नुकसान पहुंचाता है।’’

सीपीबी ने कहा कि बांग्लादेश बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है और शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी सरकार एकजुट छात्रों और आम जनता के नेतृत्व में हुए जन आंदोलन के कारण गिर गई और इसमें वामपंथी दलों ने भी भाग लिया था। हालांकि, पार्टी और वाम लोकतांत्रिक गठबंधन की संगठनात्मक कमी के कारण वे इस विद्रोह का नेतृत्व करने से चूक गए।

इस बीच बांग्लादेश वर्कर्स पार्टी ने माकपा से अपने पार्टी अध्यक्ष राशिद मेनन की रिहाई के संबंध में एक प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया, जिन्हें वर्तमान सरकार ने गिरफ्तार कर लिया है।

पाकिस्तान की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीपी) ने कहा कि उसका दृढ़ मत है कि पाकिस्तान को अपने सभी पड़ोसियों, विशेषकर भारत के साथ अच्छे संबंध रखने चाहिए।

सीपीपी ने कहा, ‘‘हम पाकिस्तान की कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा खुद को भारतीय उपमहाद्वीप के कम्युनिस्ट आंदोलन का हिस्सा मानते हैं और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को अपनी मातृ पार्टी मानते हैं। विभाजन के बावजूद हम वैचारिक रूप से जुड़े रहे और पाकिस्तान में सबसे कठिन परिस्थितियों में भी अपना संघर्ष जारी रखा।’’

फलस्तीनी पीपुल्स पार्टी ने माकपा द्वारा फलस्तीन के प्रति प्रकट की गई एकजुटता की सराहना की।

माकपा का 24वां सम्मेलन दो अप्रैल को तमिलनाडु के मदुरै में शुरू हुआ और यह छह अप्रैल तक जारी रहेगा।

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