मंजुल भारद्वाज की कविता – माँ का सृजन सौन्दर्य

कविता

माँ का सृजन सौन्दर्य

 मंजुल भारद्वाज

 

एक माँ की सुंदरता

सिर्फ़

उसका सृजन होता है

स्त्री की सुंदरता

उसका शरीर हो सकता है

सुंदर सुलझा व्यक्तित्व वो है

जो स्त्री देह की सुंदरता

और

माँ के सृजन सौन्दर्य को

विरोधभास नहीं

अपने होने की

पूर्णता समझता है !

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