जनपथ के संपादक, कथाकार अनंत कुमार सिंह की स्मृति – सभा का आयोजन
जनवादी लेखक संघ की ओर से हिन्दी के चर्चित कथाकार, उपन्यासकार ‘जनपथ’ पत्रिका के संपादक और जलेसं के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अनंत कुमार सिंह की स्मृति-सभा का आयोजन स्थानीय बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के सभागार में किया गया।
इस अवसर पर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ नीरज सिंह ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि अनंत कुमार सिंह एक जनपक्षीय साहित्यकार, कुशल संगठनकर्ता और समावेशी प्रवृत्ति के समृद्ध व्यक्ति थे। उन्होंने अपने उपन्यासों और कहानियों में समाज के मेहनतकश वर्ग के यथार्थ का अद्भुत शब्द-चित्र प्रस्तुत किया है। उन्होंने आजीवन समाज के हाशिये के बाहर के लोगों को केन्द्र में रखकर साहित्य सृजन किया। वे प्रगतिशील जनवादी मूल्यों को लेकर हमेशा साहित्य रचते रहे। वे एक साहित्यकार के साथ सक्रिय ट्रेड यूनियन नेता भी थे। उनके निधन से समाज ने अपना एक सजग पहरुआ और साहित्य ने अपना एक समर्पित रचनाकार खो दिया है।
जसम के प्रदेश-अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि अनंत कुमार सिंह जनवादी लेखक संघ के होते हुए दूसरे संगठनों के रचनाकारों के साथ सकारात्मक सरोकार के पक्षधर थे। वे स्वयं नेपथ्य में रहकर ‘जनपथ” पत्रिका के संपादन में अन्य संगठनों के ऊर्जावान लोगों को जिम्मेदारी सौंपते थे। वे जनवाद पसंद संस्कृति कर्मियों की व्यापक एकता में विश्वास करते थे। वे भोजपुर में दोस्ती की मिसाल थे। ऐसे व्यक्ति की आज सबसे बड़ी आवश्यकता है।
साहित्यकार अनंत सिंह के निकटतम मित्र और जलेसं बिहार के कार्यकारिणी सदस्य जवाहर पाण्डेय ने कहा कि वे समाज के प्रति संवेदनशील रचनाकार थे। उन्होंने चालीस साल की उनके साथ की मित्रता की जानकारी देते हुए कहा कि वे समाज के सभी वर्गों के साथ समन्वय बनाते थे। अपने आसपास के लोगों के साथ आजीवन जुड़े रहे।
श्री पांडेय ने कहा कि अनंत सिंह ने ‘जनपथ’ पत्रिका का संपादन किया। इनकी गोष्ठियों में दिग्गज रचनाकारों की भागीदारी होती थी। वे अपनी गोष्ठियों और पत्रिका ‘जनपथ’ में नए रचनाकारों को प्राथमिकता देते थे।
विदित हो कि स्व सिंह ने अपने जीवन में दस कथा संग्रह, कई बाल कथाएँ, उपन्यास, मगही में कई लोककथा के रचनाकार थे। उनकी चर्चित “मदार के फूल” पर फिल्म भी बनी।
प्रगतिशील लेखक संघ के अनीश अंकुर ने अनंत कुमार सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कई संस्मरण सुनाया।
शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार राय ने अपने संबोधन में कहा कि समाज के लिए एक अच्छे सृजनशील रचनाकार का जाना बहुत ही दुखद है। युवा कवि चंद्रबिंद सिंह ने कहा एक कहानीकार के रूप में उनकी कहानियों से मैं छात्र जीवन से परिचित था। मेरा दुर्भाग्य है कि मैं उनसे मिल नहीं सका। ‘प्राच्य प्रभा’ के संपादक विजय कुमार सिंह ने कहा कि उनकी कहानियों में सहजता होती थी। उन्होंने स्व सिंह की चर्चित पत्रिका ‘जनपथ’ को फिर से शुरू करने का अनुरोध किया। अनंत कुमार जी पत्रिका के संपादक होते हुए भी अन्य पत्रिकाओं को बेचते भी थे।
इस मौके पर श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में प्रो० अखिलेश जायसवाल, जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा के अध्यक्ष अशोक मिश्रा, कवि संतोष सिंह ‘राख’, कवि चंद्रबिंद सिंह, अवध बिहारी, जसम के अनिल अंशुमन, पत्रकार अमलेंदु मिश्र, सुजीत कुमार, उमेश कुमार, किशोर कुमार, गोपाल शर्मा, राजीव रंजन, उदयन, मुन्ना कुमार, संजीव श्रीवास्तव, मनोज चंद्रवंशी शामिल थे।
कार्यक्रम का संचालन जलेस के राज्य सचिव कुमार विनीताभ ने किया।
