कविता
कवि हूँ कोई भांड़ नहीं
राजेश भारती
भूखे नंगों की बात करना
उनके लिए देशद्रोह है
मजदूरों-किसानों की बात करना
देशद्रोह है
और मैं हूँ
आमजन की पीड़ा लिखने वाला
एक मामूली कवि
जो हारे हुए लोगों की बात करता है
सरेआम घूमते
हत्यारों की बात करता है
मुझे मालूम है
जल्द ही खुल जायेंगे
जेल के दरवाज़े
मेरे स्वागत के लिए
हत्यारों पर हो रही है पुष्प वर्षा
बच्चों के स्कूल पर अभी-अभी
हुई है बमबारी
लहूलुहान हो रही है मेरी आत्मा
यह नरसंहार देखकर
आंखें बंद भी तो नहीं कर सकता
औरों की तरह
कवि हूँ, कोई भांड़ नहीं
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