विश्व कविता दिवस और शहीदी दिवस के मौके पर काव्य गोष्ठी का आयोजन

करनाल में विश्व कविता दिवस और शहीदी दिवस के मौके पर काव्य गोष्ठी का आयोजन

 

विश्व कविता दिवस और शहीदी दिवस के मौके पर आज  सोशल जस्टिस लाइब्रेरी एंड स्टडी सेंटर संत रैदास मंदिर प्रांगण रमेश नगर सदर बाजार करनाल  में जनवादी लेखक संघ की ओर से काव्य गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें कैथल से आए राजेश भारती का एकल कविता पाठ हुआ।

गोष्ठी की शुरुआत करनाल के जिला महासचिव दीपक वोहरा ने साहित्यकारों का स्वागत से किया और मंच का संचालन भी किया।

राजेश भारती समकालीन कविताओं के हस्ताक्षर हैं। इस मौके पर उन्होंने अपनी कई चुनिंदा कविताएं पढ़ीं। जरा बानगी देखिए:

भूखे नंगों की बात करना

देशद्रोह में आता है

……

आंखें बंद भी तो नहीं कर सकता

औरों की तरह

कवि हूँ, कोई भांड नहीं

भेड़ें और कवि

कवि भेड़ों को कविता सुनाता है

वे चुपचाप चरती रहती हैं घास

कवि पूछता है:

क्या कविता समझ आई?

एक भेड़

थूक देती है घास पर

डॉ विक्रम चौहान ने दिनेश बंसल की ग़ज़ल सुनाई:

दुनिया का ढब दुनिया जैसा होता है

जो भी होता है वो अच्छा होता है

बाद में तो समझौते होते हैं दिल के

प्यार तो केवल पहला पहला होता है

कल के गंगू को हम गंगाराम कहें

रुतबा ही दौलत का ऐसा होता है

रिश्वत ली थी रिश्वत देकर छूट गया

हर ताले की चाबी पैसा होता है

सोच रहा है आँगन का बूढ़ा बरगद

घर का आख़िर क्यों बँटवारा होता है

ख़ुशियाँ चाहोंगे तो ग़म भी आयेंगे

फूलों पर काँटों का पहरा होता है

कृष्ण निर्माण ने कुछ दोहे सुनाए।

मर्यादा है तब तलक, जब तक है विश्वास।

जब विश्वास है टूटता, होता देख विनाश।।

अजब गजब सा हो गया, देख आज का दौर।

सच्चाई तो गुम गई, झूठ मचाता शोर।।

होता है विश्वास ही रिश्तों का आधार।

टूटे जब विश्वास तो, फिर सब कुछ बेकार ।।

अंत में शिक्षक, कवि और अनुवादक दीपक वोहरा ने अपनी कविता सुनाई।

मैं सबको कहता हूँ,

तुम अलग हो।

जैसे तुम ही मेरी दुनिया हो,

तुम ही हो

मेरा पहला काव्य संग्रह।

बस मुझे

इतना भर कहना है:

अब से तुम्हें किसी बंधन में

नहीं रहना है

प्यार में

बस मुक्त रहना है।

कविताओं पर बात रखते हुए कृष्ण निर्माण ने सभी की कविताओं पर टिप्पणी की। जनवादी लेखक संघ करनाल के जनरल सेक्रेटरी दीपक वोहरा धन्यवाद प्रस्तुत करके कार्यक्रम का समापन किया। इस कार्यक्रम में राजमिस्त्री रितेश भी श्रोता उपस्थित रहा।

रिपोर्टः दीपक वोहरा, सचिव, जनवादी  लेखक संघ,  करनाल