विचार व परिवार से मिली ताकत – निर्मल राठी

हरियाणाः जूझते जुझारू लोग – 117

विचार व परिवार से मिली ताकत – निर्मल राठी

सत्यपाल सिवाच

श्रीमती निर्मल राठी अध्यापक संघ की एक समर्पित और सक्रिय कार्यकर्ता रही है। उनका जन्म 3 मई 1950 को रोहतक जिले के ईस्माइला गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। मेट्रिक व सी.पी.एड. करके वे 3 अप्रैल 1972 को अस्थायी रूप में और 7 जुलाई 1972 को सीधी भर्ती के जरिए नियमित आधार पर पी.टी.आई. पद पर नियुक्त हुई। 31 मई 2008 में वे सेवानिवृत्त हईं।

निर्मल राठी से मेरा परिचय पत्राचार के जरिए हुआ था। वे अध्यापक समाज के सम्पादक के रूप में मुझे पत्र लिखकर अपने या दूसरे अध्यापकों के सेवा सम्बन्धी सवाल पूछतीं। उसी पत्रचार से बना सम्बन्ध धीरे धीरे सांगठनिक और पारिवारिक रिश्तों के रूप में विकसित होता गया। निर्मल ने एक शिक्षक के रूप में अच्छी पहचान बनाई। वे विद्यालय में खेल को विशेष प्रोत्साहन देती। लड़कियों को आगे लाने में उनकी विशेष रुचि रही है।

वे सन् 1985 में अध्यापक संघ के संपर्क में आई। सन् 1988 में जिला स्तर पर और 1993 में राज्य स्तर पर पदाधिकारी चुनी गई। एक बार सक्रिय हुई तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। रोहतक जैसे जिले में जहां कार्यकर्ताओं की संख्या कम रही, वे न तो कभी हड़ताल करने में झिझकीं और न ही स्कूल-स्कूल जाकर अध्यापकों को प्रेरित करने में। कामकाजी महिला उपसमिति, एस.टी.एफ. आई. (स्कूल टीचर्स फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया) और आल इंडिया स्टेट गर्वनमेंट एम्पलाइज फ़ेडरेशन के आयोजनों में राष्ट्रीय स्तर पर भी भाग लेती रही हैं।

सन् 1988 के बाद हुए सभी संघर्षों में वे अगली कतारों में रहीं। रोहतक में काम करते हुए उन्होंने मुकेश यादव, लाभ सिंह दलाल, रणबीर सिंह राठी, शील, गीता, शमशेर सिंह, बलजीत सिंह आदि के साथ मिलकर लगभग सभी स्कूलों में संपर्क साधने का प्रयास किया।

निर्मल राठी के प्रेरणस्रोत उनके जीवन साथी चन्द्र सिंह राठी रहे हैं। वे नेवी से सेवानिवृत्ति के बाद बैंक कर्मचारी रहे तथा यहां यूनियन की प्रगतिशीलधारा से जुड़े रहे। उनकी बड़ी बेटी नीरज प्राध्यापक एवं क्रिकेट कोच हैं और छोटी बेटी ज्योति बिजली निगम में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं। बेटा प्रवीण अपना कारोबार चलाता है और राष्ट्रीय स्तर का स्नूकर खिलाड़ी है।

लेखक – सत्यपाल सिवाच

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