विश्व कविता दिवस पर मनजीत मानवी की कविताओं पर चर्चा

विश्व कविता दिवस पर मनजीत मानवी की कविताओं पर चर्चा

जनवादी लेखक संघ हरियाणा ने की जींद में आयोजित की समीक्षा गोष्ठी

मनजीत मानवी की कविताओं का व्यथा,शोक और विषाद से गहरा रिश्ताः बजरंग बिहारी तिवारी

विश्व कविता दिवस के मौके पर आज स्थानीय लार्ड शिवा माडल स्कूल जींद में जनवादी लेखक संघ की ओर से एम डी यू रोहतक से सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉक्टर मनजीत राठी ‘मानवी’ की पुस्तकों पर परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें दिल्ली से आए डॉ बजरंग बिहारी तिवारी ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया।

आयोजन की अध्यक्षता अंबाला से आए जलेस के राज्याध्यक्ष जयपाल ने की। गोष्ठी की शुरुआत जींद के जिला सचिव मंगतराम शास्त्री ने उपस्थित कवि-लेखक-साहित्यकारों-रचनाकारों का स्वागत से किया। मंच का संचालन जलेस हरियाणा के राज्य सचिव श्रद्धानंद राजली ने किया।

इस अवसर पर मनजीत मानवी ने अपनी ‘जब कोई दस्तक देता है’, ‘बूंद बूंद शब्द’ और ‘आवाज-परवाज’ नामक पुस्तकों की से चुनिंदा कविताएं पढ़ीं। कविताओं पर बात रखते हुए बजरंग बिहारी ने कहा कि राजसत्ता की नियति को नकार कर ही सच्चा प्रगतिशील कवि हो सकता है। उन्होंने कहा कि मनजीत राठी की कविता का व्यथा,शोक और विषाद से गहरा रिश्ता है। मनजीत की कविता में प्रतिबद्धता, अन्तःकरण का विस्तार और वेदना का आर्तनाद सुनाई देता है। उन्होंने एपस्टीन फाइल का जिक्र करते हुए कहा कि आज के दौर की क्रूरता जब शब्दों से बाहर का विषय बन चुकी है ऐसे दौर में इनकी कविता निःशब्दता को तोड़ती दिखाई देती है। मनजीत की कविता उम्मीद पैदा करती है।

बजरंग बिहारी तिवारी ने कहा कि आज मूर्खों को पहचानने की बेहद जरूरत है क्योंकि अशिक्षा का घटाटोप अंधेरा चहुंओर है और सत्ता द्वारा मूर्खता सायास पसारी जा रही है। ऐसे में मनजीत की कविता रोशनी देती है और मूर्खों को पहचानने में मदद करती है।

जयपाल ने अध्यक्षीय टिप्पणी में कहा कि आज की चर्चा ने कविता के आलोचनात्मक पक्ष को समृद्ध किया है। यह चर्चा उपस्थित रचनाकारों को आत्म विश्लेषण के लिए प्रेरित करेगी । भविष्य में भी जनवादी लेखक संघ इस तरह के आयोजन करता रहेगा।

आज के कार्यक्रम में अंबाला,हिसार, कुरुक्षेत्र, रोहतक,कैथल जींद, टोहाना व दिल्ली से आए साहित्यकारों में मुख्य रूप से तनवीर जाफरी, अनुपम शर्मा, बबली लाम्बा, राजेश दलाल, रामकुमार तंवर, सरोज दहिया, डॉ शमशेर सिंह, सोहनदास, वेदप्रकाश धवन, भारती, विकास अफराज, ऋषि राजली, गुलाब सिंह ,राजेंद्र दूहन व कर्मजीत ढुल,मंजू सिंह, विक्रम धिल्लोवाल सहित लगभग पचास आसपास लोगों ने भाग लिया।

जींद के जिलाध्यक्ष राममेहर सिंह खर्ब ‘कमेरा’ने धन्यवाद प्रस्तुत करके कार्यक्रम का समापन किया।

रिपोर्टः मंगतराम शास्त्री, सचिव जनवादी लेखक संघ जींद

One thought on “विश्व कविता दिवस पर मनजीत मानवी की कविताओं पर चर्चा

  1. बेहतर रिपोर्टिंग। धन्यवाद।
    जहाँ ‘नियति’ का उल्लेख आया है वहाँ यह कहना है कि जनपक्षधर कवि राजसत्ता द्वारा तय की गई नियति को नकारता है। वह स्वयं को नियति के नियमों से मुक्त रखता है, चाहे वह धर्म द्वारा आरोपित हो या राजा/ राजसत्ता द्वारा।

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