किस्सा सुभाष चन्द्र बोस – वार्ता 5

हरियाणवी रागनी

किस्सा सुभाष चन्द्र बोस – वार्ता 5

डॉ रणबीर सिंह दहिया

 

आगे की पढ़ाई के लिए केम्ब्रिज विश्व विद्यालय में विदेश में गए। वहां के मीठे खट्टे अनुभव रहे। एक महीना लम्बी सिविल सेवा की परीक्षा लन्दन में दी। घरवालों को सूचित किया कि पर्चे अच्छे नहीं हुए। मगर जब नतीजे आये तो इनको प्रावीण्यता – सूची में चौथा स्थान मिला। घर तार भिजवाया। पर उसी वक्त सुभाष के सामने एक और समस्या आ कर खड़ी हो गई। सिविल सेवा में चयन का मतलब था ब्रिटिश सरकार की नौकरी करना। तो सुभाष बोस ने सोचा कि मेरे आदर्शों और सपनों का क्या होगा? क्या मुझे उनको तिलांजलि नहीं देनी पड़ेगी? सात महीनों के लम्बा समय लगा उनको दोराहे पर खड़े खड़े एक तरफ का फैंसला करने में और उन्होंने इस्तीफा दे ही दिया । वास्तव में यह एक गजब मिशाल बनाई थी। क्या बताया भला:-

 

सुभाष चन्द्र बोस तनै दुनिया मैं कई मिशाल बनाई||

उन बख्तों मैं हांगा लाकै आई सी एस की करी पढ़ाई||

1

कांग्रेस मैं रह कै तनै देश आजाद करवाना चाहया था

नरम दल तैं मतभेद थारे थे ज्याँ गरम दल बनाया था

त्याग कै डिग्री अपनी तनै फेर अंग्रेजों की भ्यां बुलवाई ||

उन बख्तों मैं हांगा लाकै आई सी एस की करी पढ़ाई||

2

अंग्रेज फूट गेरो राज करो की निति कसूत अपनारे थे

म्हारे बालक करकै भरती हम पै हथियार चलवारे थे

इनको ताहने खातर थामनै फेर आजाद फ़ौज बनाई ||

उन बख्तों मैं हांगा लाकै आई सी एस की करी पढ़ाई||

3

भेष बदल कै भारत छोड्या जा पहोंचे फेर जापान मैं

सपना था थारा अक यो आवै स्वराज प्यारे हिंदुस्तान मैं

महिलाओं की पलटन न्यारी थामनै खडी करकै दिखाई ||

उन बख्तों मैं हांगा लाकै आई सी एस की करी पढ़ाई||

4

सारा हिंदुस्तान याद करै तेरी क़ुरबानी नहीं भुल्या देश

हुक्मरान तनै भूल गये गोरयां आगे करया खुल्या देश

रणबीर सिंह बरोने आला करै तेरी जयन्ती पै कविताई ||

उन बख्तों मैं हांगा लाकै आई सी एस की करी पढ़ाई||

 

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लेखक – डॉ रणबीर सिंह दहिया