मंजुल भारद्वाज की दो कविताएं
1
सत्य है जन्म,जीवन और मृत्यु!
मेरे
रोम रोम में
जो राम बसा था
वो झूठ और पाखंड की
बली चढ़ गया!
जिसने आत्महत्या की हो
वो
राम नाम
सत्य नहीं है
सत्य है
मृत्यु ,जीवन और जन्म !
2
वो आ गए !
आखिरकार
आज वो
आ गए !
अब भारत में
भूख खत्म
बेरोजगारी खत्म !
शोषण खत्म
शोषक खत्म!
झूठ खत्म
झूठ बोलने वाले?
बीमार खत्म
बीमारी खत्म !
सारी फौज
सारी पुलिस को तुरंत
बर्खास्त करो
अब उनका राज्य है
देश रक्षा के लिए
उनके दूत पर्याप्त हैं !
अब हर नारी की
आधिकारिक अग्नि परीक्षा होगी
हर नारी वनवास जाएगी !
वो दासी होगी
पति की नजरों में
चरित्रहीन
अभिशप्त अहिल्या होगी!
पिता
पुत्र मोह में
मरेंगे
भाई भाई के पीठ में खंज़र घोंप
राज करेंगे !
आज से हिंदू खत्म
देश में
अब कोई हिंदू नहीं है
अब देश में
ब्राह्मण
क्षत्रिय
वैश्य
और
शूद्र हैं !
सिर्फ़
तुलसी का लिखा मिथ्या
सत्य है !
ढोल ,गंवार, पशु और नारी
सब ताड़न के हकदारी!
संविधान समाप्त
मनुस्मृति राज प्रारंभ
धोबी की चलेगी
प्रजा वनवास भोगेगी !
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