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मंजुल भारद्वाज की दो कविताएं

मंजुल भारद्वाज की दो कविताएं 1 विडंबना!   महाराष्ट्र में वारेकरी गणपति उत्सव उड़ीसा में पुरी पर्व बंगाल का दुर्गा…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- तर्कहीन सत्ता

कविता तर्कहीन सत्ता मंजुल भारद्वाज   ज़हन में सवाल हथौड़े मार रहा है क्या दुनिया वाक़ई पढ़ी लिखी है?  …

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मंजुल भारद्वाज की कविता- आस्था के कीचड़ का कमल

कविता आस्था के कीचड़ का कमल मंजुल भारद्वाज   पद व्यक्ति का विकार दूर नहीं करता अपितु विकारी व्यक्ति पद…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- धर्म,जात और राष्ट्रवाद !

कविता धर्म,जात और राष्ट्रवाद ! मंजुल भारद्वाज   विश्व की अखंडता समग्रता और विविधता का समूल नाश करने का षड्यंत्र…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – सत,सूत और सूत्र

कविता सत,सूत और सूत्र – मंजुल भारद्वाज   अचंभित करने वाला भ्रमित दौर है ‘लोकतंत्र’ संख्या बल का शिकार हो…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- कोण सकारात्मकता तय करते हैं!

कविता कोण सकारात्मकता तय करते हैं! मंजुल भारद्वाज   व्यक्ति को तरंग प्रभावित करती हैं यह तरंग सृजित होती हैं…