रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता युद्ध – जिस युद्ध में भाई भाई को मारता है

युद्ध के विरुद्ध युद्ध – 5

युद्ध तो अपने आप में एक मसला है, वह मसलों का हल क्या देगा- (साहिर लुधियानवी)

कविता हमेशा युद्ध के खिलाफ़ खड़ी रही है, भले ही तानाशाह युद्ध को राष्ट्रवादी गौरव बताकर उसका महिमामंडन करते रहे हों। लेकिन उसकी कीमत आम आदमी ने ही चुकाई है (महमूद दरवेश)। बहरहाल जो युद्ध चल रहे हैं उनके नकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहे हैं । किसी भी युद्ध में जहां बच्चे और महिलाओं समेत नरसंहार होते हैं, वहीं इस विध्वंस से अंतरराष्ट्रीय सामाजिक जीवन भी तहस-नहस होता है।

प्रतिबिंब मीडिया साहित्यकारों की इस चिंता से भली-भांति वाकिफ़ है। ‘युद्ध के विरुद्ध युद्ध’ शीर्षक के तहत हम आपका युद्ध विरोधी साहित्य प्रकाशित करेंगे। आप अपनी कविताएं, कहानियों समेत रचनाएं हमें भेजिए, उन्हें प्रतिबिंब मीडिया पर ससम्मान प्रकाशित किया जाएगा।  इस कड़ी में हमने ओमसिंह अशफ़ाक की कविताएं प्रकाशित की हैं। आज प्रस्तुत है रबीन्द्रनाथ टैगोर की कविता।

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संपादक

रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘जे युद्धे भाई के मारे भाई’ बांग्ला में लिखी थी। महात्मा गांधी ने 23 अक्टूबर 1947 को इसका हिंदी में जिस युद्ध में भाई भाई को मारता है शीर्षक से अनुवाद किया और हरिजन सेवक के 2 नवंबर 1947 के अंक में प्रकाशित किया। इस कविता का अनुवाद और मूल कविता दोनों को हिंदी में प्रकाशित किया जा रहा है। इसे हरिजन सेवक से साभार लिया गया है।

जिस युद्ध में भाई भाई को मारता है

रवीन्द्रनाथ टैगोर

जिस युद्ध में भाई भाई को मारता है

वह लड़ाई ईश्वर के खिलाफ लड़ाई है ,

जिसमें भाई भाई को मारता है ।

जो धर्म के नाम पर दुश्मनी पालता है ,

वह भगवान को अर्ध्य से वंचित करता है ।

जिस अंधेरे में भाई भाई को नहीं देख सकता ,

उस अंधेरे का अंधा तो

स्वयं अपने को नहीं देखता ।

जिस उजाले में भाई भाई को देख सकता है ,

उसमें ही ईश्वर का हँसता हुआ

चेहरा दिखाई पड़ सकता है ।

जब भाई के प्रेम में दिल भीग जाता है ,

तब अपने आप ईश्वर को

प्रणाम करने के लिए हाथ जुड़ जाते हैं ।

 

मूल बांग्ला कविता

जे युद्धे भाई के मारे भाई 

जे युद्धे भाई के मारे भाई

से लड़ाई ईश्वरेर विरुद्धे लड़ाई ।

जे कर धर्मेर नामे विद्वेष संचित ,

ईश्वर के अर्ध्य हते से करे वंचित ।

जे आंधारे भाई के देखते नाहि भाय

से आंधारे अंध नाहि देखे आपनाय ।

ईश्वरेर हास्यमुख देखिबारे पाइ

जे आलोके भाई के देखिते पाय भाई ।

ईश्वर प्रणामे तबे हाथ जोड़ हय ,

जखन भाइयेर प्रेमे विलार हृदय ।

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