आधुनिक साहित्य का नया बीस सूत्रीय कार्यक्रम 

डॉ जगदीश्वर चतुर्वेदी हिंदी के प्रोफेसर रहे हैं। लेखक हैं। सत्तर से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। नई तकनीक के जानकार हैं और सोशल मीडिया का बेहतर ढंग से और नियमित उपयोग करते हैं लेखन के लिए। फेसबुक पर तो सक्रिय रहते ही हैं, वीडियो भी बनाकर डालते हैं। साहित्य के प्रति उनकी चिंता जायज है। उन्होंने आधुनिक साहित्य के लिए बीस सूत्रीय कार्यक्रम घोषित किया है। आप सभी लोग पढ़िए, अगर सहमत हों तो उनका अनुसरण कीजिए। इसे उनके फेसबुक से लिया गया है। संपादक

 

आधुनिक साहित्य का नया बीस सूत्रीय कार्यक्रम

 

डॉ जगदीश्वर चतुर्वेदी

 

विद्वान,सम्मान,लेखक,साहित्यकार,बुद्धिजीवी,पंडित आदि पदबंध ब्राह्मणवाद की सृष्टि हैं,बंधु,कॉमरेड , मित्र ,नागरिक आदि कामगारों की सृष्टि हैं ।

हमें उन तमाम पदबंधों और पद्धतियों से बचना चाहिए ,जो ब्राह्मणवादियों ने बनाए हैं, दिक्कत यह है हम चाहते हैं ब्राह्मणवाद अपदस्थ हो लेकिन सोचते उनके ही पदबंधो में हैं,ऐसी अवस्था में वे अपदस्थ नहीं होंगे बल्कि ब्राह्मणवाद विरोधी ताकतें उनके अंदर प्रवेश कर जाती हैं और व्यवहार में यही हो रहा है,ब्राह्मणवाद विरोध,नव्य-ब्राह्मणवाद है।ये दोनों ही मार्ग लेखन के लिए कष्टदायक हैं।लोकतंत्र में रहते हैं तो नागरिक बनें,लेखक नहीं।

कुछ बातें जिनको समझना जरूरी है-

1.कुछ अच्छा लिखिए,बेहतर लिखिए,काम का लिखिए,यह कहना ,शिक्षक-समीक्षकों की अ-साहित्यिक प्रवृत्ति है।

2.अपने लिखे से मोह नहीं रखना चाहिए।स्व-लेखन से मोह बीमारी है।

3.कल्ट या पंथ का फिनोमिना वर्चस्ववादी दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है।

4.नियमित अच्छी चीजें पढ़ने की आदत होनी चाहिए।नियमित रीडिंग बेहतर इंसान बनाती है।

5.मनुष्य के जीवन का खालीपन दो चीजों से भरा जा सकता है ,वह है प्रेम और त्याग ।

6.रामचरित मानस में राम को एक ही चीज पसंद है प्रेम।प्रामाणिक प्रेम प्रसन्नता का जनक है।

7.श्रद्धा का स्थान फेसबुक नहीं मनुष्य का हृदय है।

8.ठठ्ठेबाजी और नॉनसेंस भाषा को एमटीवी आदि टीवी चैनल ने रियलिटी शो का अनिवार्य अंग बनाकर रद्दी को मुनाफे में बदल दिया है। आज के युवाओं को इस तरह के रियलिटी शो की तू-तड़ाक की भाषा प्रभावित कर रही है।

9.मैं गंभीर लोगों से डरता हूं।मुझे गंभीरता नहीं व्यंग्य पसंद है।

10.फेसबुक खेल है,सूरदास के अनुसार- खेलन में को काकों गुसईंया।खेल में सब समान हैं।

11.कला ज्ञान मनुष्य को बूढा नहीं होने देता।

12.धर्म पुरानी जीवन संहिता है,संविधान नई जीवन संहिता है। तय करो किस ओर हो तुम।

13.तर्क में परास्त करना सबसे घटिया चीज है,इससे आनंद नष्ट होता है।सुंदर तर्क वह है जो संवाद में खींचे,संवाद खुला रखे।

14.पवित्रता सबसे घटिया शब्द है,इसने सबसे ज्यादा पीड़ित किया है।

15.मोक्ष मतलब मरना नहीं,बल्कि मोहरहित सजग जीवन है।

16.जो धर्म मातहत भाव का प्रचार करे वह धर्म नहीं अधर्म है।

17.विवेकहीन भक्ति और प्रेम अंततःदुख देते हैं।

18.भक्ति और प्रेम में विधि निषेध नहीं होते,बल्कि सभी किस्म के विधि निषेधों का अंत हो जाता है।

19.व्यक्ति के विकास के लिए एकांत जरूरी है।

20.दुनिया से विरक्ति पैदा कर दे वह गुरू नहीं बल्कि दुनिया को बदलना समझाए वह है गुरू।