मनजीत सिंह की कविता – नई शुरुआत का जादू

कविता

नई शुरुआत का जादू

मनजीत सिंह

हर पल कहे—अब फिर से शुरू कर,

टूटी उम्मीदों को खुद से जोड़ कर।

पहला कदम ही सबसे भारी लगे,

पर उसी से सपनों का पथ सजे।

उम्र कभी सपनों से बड़ी नहीं होती,

हिम्मत हो तो राह खुद-ब-खुद होती।

हर अंत के भीतर एक आरंभ छिपा,

दर्द की राख में नया सूरज लिखा।

पूरी सीढ़ी दिखे, ये ज़रूरी नहीं,

बस पहला क़दम—यही जीत सही।

हार सिखाती है बेहतर चलना,

फिर से समझदारी से आगे बढ़ना।

आज का दिन एक कोरा पन्ना है,

जिस पर भविष्य का उजला सपना है।

जहाँ हो वहीं से शुरुआत करो,

जो है उसी से अपनी बात करो।

अंत का भी उत्सव मनाना सीखो,

वहीं से नई राहें दिखना सीखो।

क्योंकि जीवन का सबसे बड़ा कमाल,

शुरुआत करना होता साहस विशाल।

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