महात्मा गांधी सुभाष बोस आपस के मैं टकराये रै

किस्सा सुभाष चन्द्र बोस – वार्ता 9

महात्मा गांधी सुभाष बोस आपस के मैं टकराये रै

डॉ रणबीर सिंह दहिया

20 जुलाई 1940 को जर्मनी ने ब्रिटेन पर जब बमबारी शुरू की तो इसका जबरदस्त प्रभाव भारतीय स्वतंत्रता संग्रामी जनमानस व  नेताओं पर पड़ा । ‘शत्रु का दुश्मन अपना मित्र’ के विचार से ज्यादातर लोग अभिभूत हुए और जर्मनी के पक्षधर। जर्मनी से ब्रिटेन को पिटते देख आम भारतीय खुश थे। क्रांतिकारी मत का प्रतिनिधित्व कर रहे सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी की वैरियत का शिकार हुए। क्या बताया भला-

 

दूसरे विश्व युद्ध पै कांग्रेस मैं विचार कई पाये रै।।

महात्मा गांधी सुभाष बोस आपस के मैं टकराये रै।।

1

एक सितंबर उनतालीस नै युद्ध का डंका बजाया था

जर्मनी का पौलैंड पै हमला हिटलर नै करवाया था

ब्रिटेन कै ऊपर जर्मनी नै बमबां का दौर चलाया था

शत्रु का दुश्मन मित्र अपना भारत मैं विचार छाया था

जर्मनी नै ब्रिटेन पिट्या हिन्दवासी जर्मनी साथ पाये रै।।

2

देश की मुख्यधारा आलयां नै ब्रिटेन कै शर्त लगाई रै

आजादी की गारंटी शर्त पै ब्रिटेन की साथ निभाई रै

ब्रिटेन ढावण का मौका सै क्रांतिकारी आवाज आई रै

इसे कारण सुभाष बोस की कांग्रेस नै करदी विदाई रै

इन हालातों मैं बोस नै अपने न्यारे रास्ते अपनाए रै।।

3

फेर फारवर्ड ब्लॉक पार्टी सुभाष बोस नै बनाई रै

विदेश जावण की बोस नै अपनी इच्छा जताई रै

पंजाब कीर्ति किसान पार्टी बोस की मदद पै आई रै

पेशावर रास्ते काबुल तक भेजने की स्कीम सुझाई रै

भारत सुरक्षा क़ानून मैं सुभाष जेल के मैं खंदाये रै।।

4

जेल मैं क्रान्तिकारियाँ साथ विचार विमर्श हुया कहते

देश छोड़ कै जावण का फैसला सुभाष नै लिया कहते

आमरण अनशन गेल्याँ गिरफ्तारी विरोध किया कहते

रणबीर जनता के दबाव तैं जेल तैं करया रिहा कहते

गौरी सरकार नै घर मैं बोस नजरबन्द करवाये रै।।

 

लेखक – डॉ रणबीर सिंह दहिया

 

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