जयपाल की कविता- उन्हें देखा गया

कविता

उन्हें देखा गया

जयपाल

 

नए साल पर

उन्हें आग तापते देखा गया सड़क किनारे

 

पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी को

देखा गया

अंतिम पंक्ति में खड़े हुए उदास

 

एक दिन जब उनके घरों को

अवैध बताकर जमींदोज कर दिया गया

वे भागते-हांफते देखे गए सरकारी दफ्तरों में

फिर मिले वे सरकारी हस्पतालों के गलियारे में

उनकी बीमारी कभी किसी को समझ नहीं आई

 

इसी क्रम में वे देखे गए धर्म स्थानों की परिक्रमा

और पवित्र तीर्थों में सदी का स्नान करते हुए

 

मोक्ष पाने की चाह में

उन्हें देखा गया

भीड़ में कुचले जाते हुए

रेलवे स्टेशनों पर बदहवास भागते हुए

परिजनों के शवों के साथ

 

और…..

हमें भी देखा गया

उन्हें देखते हुए !