जयपाल की कविता- उनका नया साल

 कविता-

उनका नया साल

जयपाल

1

 

जिनकी छाती पर

शताब्दियों के दर्द का कैलेंडर लटका है

उनके माथे पर

नया साल लिखने से क्या होगा !

 

2

 

उनके लिए

साल नया हो या पुराना

ईश्वर की तरह होता है

जो कहीं दिखाई नहीं देता

 

3

 

साल के पहले ही दिन

नंगे पैर भीख मांगता बच्चा

नये साल में प्रवेश कर रहा है

नंगे पैर ही उसे पार करना है

नए साल का जश्न

 

4

 

बच्चा देखता है

नये साल का कैलेंडर

पेट दबाकर

मां देखती है

पिछले साल का कैलेंडर

आंसू छिपाकर

 

5

 

नये साल में पसर गया है

पिछले साल का सन्नाटा

लोग कहते हैं

साल बदल गया है !

 

6

 

घर में टांग लिया है

नए साल का कैलेंडर

समाज में टंगा है

हजारों साल पुराना कैलेंडर

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