व्यवहार का पैटर्न ही बताता है-अहंकार है या संस्कार

सामाजिक सरोकार

व्यवहार का पैटर्न ही बताता है-अहंकार है या संस्कार

डॉ रीटा अरोड़ा

 

बातों से नहीं, बार-बार दोहराए गए व्यवहार से तय होती है किसी व्यक्ति की असली पहचान। आज के समय में हम लोगों को उनकी बातों से आंकने लगे हैं। प्रभावशाली शब्द, विनम्र भाषा और बड़े-बड़े वादे हमें आसानी से प्रभावित कर लेते हैं। लेकिन सच्चाई इससे कहीं अधिक सरल और स्पष्ट है-किसी की असली पहचान उसके शब्दों में नहीं, बल्कि उसके व्यवहार के पैटर्न में छिपी होती है।

इंसान क्या कहता है, यह उतना मायने नहीं रखता जितना वह बार-बार क्या करता है। क्योंकि स्वभाव कोई एक घटना नहीं, बल्कि लगातार दोहराया जाने वाला व्यवहार है। एक बार की गलती संयोग हो सकती है, लेकिन वही गलती जब बार-बार दोहराई जाए तो वह व्यक्ति की प्रकृति बन जाती है।

मनोवैज्ञानिक शोध भी यही साबित करते हैं। अरस्तू ने हजारों साल पहले कहा था-“हम वही हैं जो हम बार-बार करते हैं।” आधुनिक अध्ययनों में भी पाया गया है कि छोटे-छोटे दोहराए जाने वाले व्यवहार (जैसे समय की पाबंदी, दूसरों की बात सुनना, कठिन समय में साथ देना) ही किसी के चरित्र की सबसे सटीक तस्वीर पेश करते हैं।

अक्सर हम सामने वाले के व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश करते हैं-“शायद तनाव में होगा”, “इरादा गलत नहीं होगा”। लेकिन जब वही व्यवहार बार-बार सामने आता है, तो बहाने नहीं चलते। वह सच्चाई बन जाता है।

उदाहरण के लिए, जो व्यक्ति हर बातचीत में आपकी बात बीच में काटता है या आपकी राय को नजरअंदाज करता है, वह सिर्फ अशिष्ट नहीं-उसका नजरिया ही श्रेष्ठता (Superior mindset) का है। जो व्यक्ति केवल अपनी सुविधा के अनुसार संबंध निभाता है, वह व्यस्त नहीं, बल्कि स्वार्थी है। कार्यस्थल पर जो हर बार जिम्मेदारी से बच निकलता है, वह चाहे जितनी मीठी बातें करे, भरोसेमंद नहीं हो सकता।

यहीं व्यवहार का पैटर्न असली आईना बन जाता है। जो हर किसी के साथ सम्मान से पेश आता है-चाहे वह छोटा हो या बड़ा-वह अपने संस्कार दिखाता है। और जो केवल ताकतवर या फायदेमंद लोगों के सामने विनम्र होता है, वह अपने अहंकार को उजागर करता है।

आज के डिजिटल दौर में यह फर्क और भी साफ दिखने लगा है। सोशल मीडिया पर विनम्रता दिखाना आसान है, लेकिन वास्तविक जीवन में वही व्यवहार निभाना कठिन। शब्दों में मिठास रखना सरल है, लेकिन व्यवहार में निरंतरता बनाए रखना ही असली परीक्षा है।

इसलिए किसी को समझना है तो उसके शब्दों को कम और उसके लगातार दिखने वाले व्यवहार को ज्यादा देखिए। क्योंकि अंततः-

इंसान वही होता है जो वह बार-बार करता है और उसका व्यवहार का पैटर्न ही उसकी असली पहचान बताता है।

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