भूले बिसरे खिलाड़ी
शानदार लेग स्पिनर वामन कुमार
आज जिक्र करते हैं 1960 के दशक के उस शानदार लेग-स्पिनर का, जिसकी फिरकी ने अपने पहले ही मैच में इतिहास रच दिया था— वामन कुमार!
वामन कुमार एक ऐसे गेंदबाज थे जिन्हें उनकी सटीकता और गेंद को हवा में ‘ड्रिफ्ट’ कराने की क्षमता के लिए जाना जाता था। उन्होंने उस दौर में अपनी पहचान बनाई जब भारतीय क्रिकेट में स्पिनरों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा हुआ करती थी।
वामन कुमार के करियर की स्वर्णिम यादें:
* सपनों जैसा डेब्यू (1961): पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में अपना पदार्पण करते हुए उन्होंने पहली ही पारी में 64 रन देकर 5 विकेट झटके। वे डेब्यू पर 5 विकेट लेने वाले चुनिंदा भारतीय गेंदबाजों की फेहरिस्त में शामिल हो गए।
* घरेलू क्रिकेट के महाबली: रणजी ट्रॉफी में मद्रास (तमिलनाडु) के लिए उनका प्रदर्शन किसी किंवदंती से कम नहीं है। उन्होंने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 400 से अधिक विकेट लिए।
* पारी में सभी 10 विकेट: 1970-71 में उन्होंने एक प्रथम श्रेणी मैच में एक पारी के सभी 10 विकेट लेने का दुर्लभ कारनामा करने के बेहद करीब पहुँच गए थे (उन्होंने एक पारी में 9 विकेट लिए थे)।
* मद्रास क्रिकेट के स्तंभ: उन्होंने दशकों तक मद्रास की गेंदबाजी की कमान संभाली और कई युवा स्पिनरों के मार्गदर्शक बने।
* दुर्भाग्यशाली करियर: डेब्यू पर शानदार प्रदर्शन के बावजूद उन्हें भारत के लिए केवल 2 टेस्ट खेलने का मौका मिला, जिसका मुख्य कारण उस समय भारतीय टीम में स्पिनरों की भरमार होना था।
वामन कुमार ने अपनी जादुई उंगलियों से घरेलू क्रिकेट में जो छाप छोड़ी, उसे आज भी तमिलनाडु क्रिकेट के गलियारों में सम्मान के साथ याद किया जाता है। भारतीय क्रिकेट के इस “क्लासिक लेग-स्पिनर” को हमारा सादर नमन!
देसीवाला क्रिकेट के फेसबुक वॉल से साभार
