आज भी हरियाणा अंधविश्वासों के घेरे में

आज भी हरियाणा अंधविश्वासों के घेरे में

रणबीर सिंह दहिया

 

हमारे हरियाणा के समाज में आम तौर पर चर्चा रहती  है कि करवा का व्रत रखने से पति की आयु बढ़ती है। दूसरी तरफ कहते हैं कि इन्सान के जन्म और मृत्यु का समय (और स्थान भी) तय है। तो फिर व्रत से आयु कैसे और क्यों बढ़ेगी? सुनने में आता है कि दक्षिण और पूर्वोतर भारत में अधिकतर स्त्रियाँ यह व्रत नहीं रखतीं। तो क्या उनके पतियों की कम आय में ही मृत्यु हो जाती है ?  नहीं ऐसा नहीं होता। दरअसल यह सब पुरुष-प्रधान समाज की बनाई चीजें हैं। पत्नी की आयु बढ़े ऐसा कोई व्रत पुरुष के लिए क्यों नहीं बना? स्पष्ट है कि यह सब आधारहीन बातें हैं. अन्धविश्वास हैं। इसके चलते आज करवा के व्रत का पूरा बाजार बन गया है। ये और ऐसी कई उलझनों के जाल में देस के गरीब और अनपढ़ ही नहीं, पढ़े-लिखे भी फँसे रहते हैं। गरीब और अनपढ़ लोग कई बार पढ़े-लिखों की नकल में इसी तरह डूबते हैं। यदि हमें इनसे बचना है तो इसके लिए हमें विवेक और तर्क से काम लेना होगा।

एक खास बात और देखने में आती है कि सेहत से जुड़े अन्धविश्वास भी सिर चढ़कर बोलते हैं। जैसे, यह मानना कि किसी खास जोहड़ / तालाब में नहाने से पीलिया या चर्म रोग ठीक हो जाते हैं, सिर्फ एक भ्रम है।

हरियाणे का एक उदाहरण देखने की बात है। एक मरीज को पीलिया हो गया। पड़ोसियों ने सुझाया कि छारा (साँपला के पास, जिला रोहतक) के जोहड़ (तालाब) में नहा आओ-ठीक हो जायेगा। लोग मानते हैं कि उस तालाब के पानी और मिट्टी में कुछ ऐसा है, जो मरीज को ठीक कर देता है। जबकि सच कुछ और ही है। पीलिया आमतौर पर वायरल होता है जो दो हफ्ते में अपने-आप ठीक हो जाता है आराम करने से। छारा नहाने जाने के लिए कुछ दिन सोचते-सोचते बीत गये, फिर नहाकर आये, तब तक वह खुद ही कुछ ठीक होने लगता है। लेकिन श्रेय उस तालाब के पानी को देते हैं। यह अन्ध आस्था है, जो समाज की सोच को स्वस्थ और बेहतर नहीं होने दे रही। वक्त और धन की बर्बादी अलग होती है।

एक बार की बात की झरौट के बुजुर्ग अपनी घरवाली को लेकर आये । उसकी एक टांग में गैंग्रीन हो गई बायीं या दायीं याद नहीं। हमने सभी concerned विभागों की राय ली और यह तय हुआ कि amputation करनी होगी । ताऊ को समझाया। कटने की बात सुनकर दोनों घबरा गए । ताऊ मेरे कमरे में आया और हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया। मैने बिठाया और उसकी और देखा। ” काटनी ए पड़ैगी डॉ साहब। और कोए राह कोण्या इसकी ज्यान नै खतरा करदेगी या गैंग्रीन — मैंने जवाब दिया बहुत धीमे से। ताऊ बोल्या– न्यों कहवै सैं अक गुड़गांव मैं शीतला माता की धोक मारकै ठीक होज्यां हैं। मैंने कहा– मेरी जानकारी में नहीं। ताऊ– एक बार जाना चाहवैं सैं। फेर आपके डॉ न्यों बोले–  लेफ्ट अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस (LAMA) होज्या । छुट्टी कोण्या देवें । और फिर हमारे वार्ड में दाखिला नहीं हो सकता। चाहूँ सू आप के वार्ड मैं इलाज करवाना। मैने कहा एक शर्त है– जै इसकी टांग धोक मारकै ठीक होज्या तो भी लियाईये और नहीं ठीक हो तो भी। ठीक होगी तो मैं बाकी के इसे मरीज भी वहीं गुड़गांव भेज दिया करूंगा और ठीक न हो तो आप ये सारी बात एक पर्चे में लिखकर बांटना कि वहां मेरी घरवाली ठीक नहीं हुई। हम ने डिस्चार्ज ऑन रिक्वेस्ट  कर दिया । दो दिन बाद वापिस आ गया । महिला की हालत ज्यादा खराब हुई थी। खैर एमपुटेशन  हड्डी विभाग  के सहयोग से की और महिला ठीक होकर चली गयी । बुजुर्ग जाने से पहले आया कमरे में और कहने लगा– पर्चा छापना चाहूँ सूँ फेर गांव वाले कह रहे हैं शीतला माता के खिलाफ पर्चा? बहोत दबाव सै मेरे पै डॉ साहब । बुजुर्ग ने मेरे पैरों की तरफ हाथ किये । मैने बुजुर्ग को छाती से लगा लिया और आशीर्वाद देने को कहा।

ब्रह्मा के चार सिर थे- क्या यह संभव है? यह केवल मिथक और प्रतीक है। श्रृंगी ऋषि हिरण से पैदा हुए, हनुमान कान से, करण सूर्य से पैदा हुए, गणेश मैल से और जनक पिता की जाँघ से पैदा हुए, सीता घड़े से और राम-लक्ष्मण आदि खीर खाने से पैदा हुए, लव-कुश घास से और मकरध्वज मछली से पैदा हुए- कितनी हवाई बातें हैं, जो पाठकों का दिमाग खराब कर उनकी सोच को कुन्द करती हैं।

धूर्त और मूढ़मति – दोनों तरह के राजनेता कुर्सी के लिए अंधविश्वास फैलाते हैं। कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के एक नेता ने कहा कि मोर के आँसुओं से मोरनी गर्भवती होती है। इसी झूठ को एक साध्वी ने भी धर्मसभा में कहा। इसीलिए हमें विवेक से काम लेने की बड़ी जरूरत है।

 

इन्हीं विचारों को दो रगनियों के माध्यम से कुछ इस प्रकार अभिव्यक्ति दी गई है:-

वाह रे इन्सान…

(रागिनी)

डॉ. रणबीर सिंह दहिया

 

घर में निकला चूहा… दवा डाल मार गिराया। मंदिर में माटी के चूहे को…. अपना दुखड़ा बोल आया।

बच्चे माँगें खिलौने, माँ-बाप ने डाँट दिया… मंदिर की पेटी में दिल खोल चन्दा डाल दिया।

 

नहाकर गंगा में, सब पाप धो आया…

वहीं से धोये पापों का पानी भर लाया।

माटी की मूरत से अपनी जिन्दगी की भीख माँग आया…

उसी मूरत के सामने जानवर बेजुबान काट आया।

जिन्दगी भर कौए को अशुभ मानता आया… फिर मरे माँ-बाप को कौआ समझ भोजन करा आया।

वाह रे इन्सान तेरा तरीका… मेरी समझ में कभी न आया !!!

 

रागनी..2

अन्धविश्वास ने भारत में आज पूरा उछाल दिखाया है॥

महाकाव्य म्हारे जितने सैं सबको इतिहास बताया रै॥

1.

लक्ष्मी की पूजा तैं कहते अपरम्पार धन मिल ज्यावे है फेर व्यापार लेन-देन का यो झमेला समझ ना आवै रे टी वी चैनलां नै दिन-रात लक्ष्मी का घणा शोर मचाया है ॥

2.

सत्यनारायण कथा तैं कहते सुख संसाधन मिल जाते

फेर काम की तलाश मैं क्यों फिरें बदेशों तक धक्के खाते

आम जनता ने बेकूफ़ बनाकै राज अपना जमाया रै॥

3.

जो किसान पसीना बहाकै नै सारे भारत का पेट भरै

जै मीहं इन्द्र पूजे तें आवै तो किसान आत्महत्या क्यों करै

किसान की लूट छिपावण तांहि अन्धविश्वास फैलाया रै॥

4.

जै रक्षा-सूत्न म्हारी सबकी रक्षा सब क्याहें तै करता रै

तो धर्म पाखण्डी अर यो नेता क्यों कमांडो लिये फिरता रै

समाज सुधारकों नै भी था अपने बखताँ समझाया रै॥

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