गणतंत्र दिवस पर विशेष रागनी
छब्बीस जनवरी
डॉ रणबीर दहिया
छब्बीस जनवरी का दिन लाखां ज्यान खपा कै आया।।
घणे हुए कुर्बान देश पै जिब आजादी का राह पाया।।
1
सैंतालिस की आजादी ईब यो दो हजार छब्बीस आ लिया
बस भाड़ा था कितना याद करो आज कड़ै सी जा लिया
एक सीमेंट कट्टा कितने का आज कौणसे भा ठा लिया
एक गिहूं की बोरी देकै आज यो खाद कितना पा लिया
*चिन्ता नै घेर लिया जिब यो सारा लेखा जोखा लाया।*।
घणे हुए कुर्बान देश पै जिब आजादी का राह पाया।।
2
आबादी तै बधी तीन गुणी पर नाज चौगुणा पैदा करया
सैंतालिस मैं थी जो हालत उसमैं बताओ के जोड़ धरया
बिना पढ़ाई दवाई खजाना हमनै सरकारी रोज भरया
ईमानदारी तै करी कमाई पफेर बी तमनैनहीं सरया
*भ्रष्टाचार बेइमानी नै क्यों सतरंगा जाल बिछाया।।*
घणे हुए कुर्बान देश पै जिब आजादी का राह पाया।।
3
यो दिन देखण नै के सुभाष बोस नै फौज बनाई थी
यो दिन देखण नै के भगत सिंह नै फांसी खाई थी
यो दिन देखण नै के गांधी बापू जी नै जान खपाई थी
यो दिन देखण नै के अम्बेडकर ने संविधान रचाई थी
*नये-नये घोटाले देख कै यो गरीब का सिर चकराया।।*
घणे हुए कुर्बान देश पै जिब आजादी का राह पाया।।
4
हरियाणा धरती पै कसम उठावां नया हरियाणा बणावांगे
भगत सिंह का सपना अधूरा उनै करकै पूरा दिखावांगे
ना हो लूट खसोट देश मैं या घर-घर अलख जगावांगे
या दुनिया खूबै सुन्दर होज्या मिलकै नै हांगा लगावांगे
*रणबीर सिंह मिलकै सोचो गया बख्त किसकै थ्याया।।*
घणे हुए कुर्बान देश पै जिब आजादी का राह पाया।।
