कविता
इस दर्द से रिश्ता मेरा है!
ओमसिंह अशफ़ाक
ये दर्द अकेला ना तेरा है!
इस दर्द से रिश्ता मेरा है!
साठ साल की आजादी में
सह लिया कष्ट भतेरा है !
हिम्मत से ही काम बनेगा
तू युगों का कुशल चितेरा है!
रोज बदलती इस दुनिया में
थोड़ा-और अंधेरा है !
अंधकार से क्या डरना,
जब आगे खड़ा सवेरा है!
साफ नजर से दिखेगा वो-
भागा जाए लुटेरा है !
उसकी गांठे ढीली कर,
जिस जाल़ ने तुझको घेरा है!
एक कठिन दौड़ तू और जीत ले
फिर मंजिल पे डेरा है !
आलीशान खड़े महलों में-
बहा खून-पसीना तेरा है!
किस्मत का तो झूठा किस्सा-
इनमें हिस्सा तेरा है !
लूटपाट का तंत्र तोड़ दे,
जात-धर्म का भ्रम छोड़ दे,
सोचण की तू दिशा मोड़ दे,
फिर तो भविष्य सुनहरा है!
वोट के बदले काम मांग ले,
मेहनत का तू दाम मांग ले-
कर एक्का सरेआम मांग ले,
मेहनतकश का हाथ थाम ले,
ये हक भी तो तेरा है?
समता का तू ला दे नारा,
राह मुक्ति का सबसे प्यारा,
बिन इसके ना तेरा गुजारा,
बाद में इसके देख नजारा,
क्यों मुरझाया चेहरा है ?
ये दर्द अकेला ना तेरा है!
इस दर्द से रिश्ता मेरा है!
साठ साल की आजादी में,
सह लिया कष्ट भतेरा है!
