वरिष्ठ पत्रकार जगातार सिंह सिद्धू इधर लगातार ललित निबंध लिख रहे हैं। अपने फेसबुक वाल पर इन छोटे निबंधों के जरिये वे वर्तमान की उस दुनिया की सैर कराते हैं जिसे हम सभी महसूस तो करते हैं लेकिन उन्हें शब्दों में ढाल नहीं पाते। उनकी लालित्यसे परिपूर्ण निबंध एक खुशनुमा संसार की रचना करते हैं। बातचीत की भाषा में सरस तथा सरल शब्दों में वह एक वृत्तांत रचते हैं जो दिल को छू लेता है। दरअसल आजइस तरह का लेखन नदारद हो चुका है।
प्यार के कुछ शब्द!
– जगतार सिंह सिद्धू
आज सुबह, जब चंडीगढ़ में हल्की बारिश हो रही थी, तब मुझे कृषि से जुड़े आर्थिक मुद्दों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, देविंदर शर्मा का फ़ोन आया। उसने कहा, “मैं थोड़ा उदास महसूस कर रहा था, इसलिए मैंने सोचा कि अपना मूड ठीक करने के लिए मैं आपसे थोड़ी देर बात कर लूँ।”
मैंने देविंदर शर्मा को जवाब दिया, “सच तो यह है कि आपकी सुबह की इस कॉल ने मुझे वैसी ही खुशी दी है, जैसी उस बारिश ने, जिसने चंडीगढ़ के पेड़ों और पौधों से सर्दियों की धूल की परत धो डाली है। बारिश के बाद पेड़-पौधे जैसे साँस लेते हैं और खुशबू व उमंग के साथ खिल उठते हैं—ठीक वैसे ही, जैसे दोस्तों के साथ दिल से की गई बातचीत मन को खुशी से भर देती है।”
मैंने उनसे कहा, “ये शब्द आपकी तारीफ़ करने के लिए नहीं हैं; ये सीधे मेरे दिल की गहराइयों से निकले हैं। मैं तो बस एक आम इंसान हूँ, लेकिन मैंने प्रकृति के तोहफ़े—बारिश—के बारे में बात की। जब किसी को अपनेपन का एहसास होता है, तो वह ठीक बारिश के आशीर्वाद जैसा ही होता है।”
मैंने तो बस वही कहा जो हर कोई जानता है—कि प्यासे के लिए पानी अनमोल होता है। हर कोई जानता है कि पानी प्यास बुझाता है, लेकिन उस राहत के एहसास को तो खुद अनुभव करना पड़ता है। बारिश का आनंद आपके भीतर ही छिपा होता है, क्योंकि बाहरी वातावरण आपके मन की भीतरी स्थिति को ही दर्शाता है। उदाहरण के लिए, यदि शांत पानी में गिराया गया एक छोटा-सा पत्थर भी उसमें लहरें पैदा कर सकता है, तो यकीनन आपकी प्रेमपूर्ण बातचीत भी किसी के मन में खुशियों की लहरें जगा सकती है!
(आज के लिए इतना ही।)
—————–
