जो कश्मीरी आतंकवाद की निंदा करते हैं, उन पर संदेह करना राष्ट्रीय हित में नहीं: तारिगामी

 जो कश्मीरी आतंकवाद की निंदा करते हैं, उन पर संदेह करना राष्ट्रीय हित में नहीं: तारिगामी

श्रीनगर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता और कुलगाम से विधायक मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने शनिवार को कहा कि दिल्ली विस्फोट के बाद हर कश्मीरी पर शक करना राष्ट्रीय हित में नहीं है और इससे सुरक्षा स्थिति में सुधार नहीं होगा।

तारिगामी ने संवाददाताओं से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में लालकिले के पास हुआ विस्फोट दुर्भाग्यपूर्ण है और हर कश्मीरी निर्दोष लोगों की हत्या की निंदा करता है।

उन्होंने कहा, “निर्दोष लोगों की हत्या किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध जताने वाले हर कश्मीरी ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे निर्दोषों की हत्या को स्वीकार नहीं करते।”

तारिगामी ने कहा कि दिल्ली विस्फोट के दोषियों की गहन जांच कर उन्हें न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने “सफेदपोश आतंकवादी” शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए आतंकी हमलों में 2013 में मारे गए डॉ. शेख जलाल-उद-दीन, 1993 में मारे गए डॉ. अब्दुल अहद गुरु, 1990 में मारे गए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मौलाना मोहम्मद सैयद मसूदी और मीरवाइज मोहम्मद फारूक को याद किया।

तारिगामी ने कहा, “किन लोगों को सफेदपोश कहा जा रहा है? डॉ. जलाल-उद-दीन भी सफेदपोश थे, डॉ. गुरु भी सफेदपोश थे। उन्हें किसने मारा? हमारे विद्वान और पहले सांसद मौलाना मसूदी को किसने मारा? मीरवाइज को किसने मारा? आज आप हर चिकित्सक, हर कश्मीरी पर शक करते हैं? यह राष्ट्रीय हित में नहीं है। इससे सुरक्षा हालात भी बेहतर नहीं होंगे। यही मेरी सलाह है।”

कश्मीर पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा बिजली की अधिक मांग वाले समय में उपभोक्ताओं पर 20 प्रतिशत अधिभार लगाए जाने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि यह जनता के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा, “विभाग ने सिर्फ प्रस्ताव भेजा है, अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। मैं मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि इस प्रस्ताव को वापस लिया जाए और बीपीएल वर्ग को वह राहत दी जाए जिसका वादा किया गया था।”