साम्राज्यवाद दुनिया की सबसे विनाशकारी व्यवस्था

साम्राज्यवाद दुनिया की सबसे विनाशकारी व्यवस्था

    मुनेश त्यागी

पूरे संसार में सामंतवाद, पूंजीवाद और साम्राज्यवाद देश दुनिया की सबसे लुटेरी और शोषणकारी व्यवस्थाएं रही हैं। आज साम्राज्यवाद दुनिया की सबसे बड़ी हत्यारी, लुटेरी वैश्विक प्रभुत्वकारी युद्धोंन्मादी और विनाशकारी व्यवस्था बनाकर दुनिया के सामने है। यह दुनिया की सबसे मुनाफाखोर सोच और मानसिकता बन गई है। यह मानव विरोधी व्यवस्था और सोच अपने मुनाफों को बढाये रखने के लिए, पूरी दुनिया को अपने कब्जे में लेने पर उतर आई है।

अपने इन विश्वविरोधी और अमानवीय मंसूबों को पूरा करने के लिए, दुनिया भर की साम्राज्यवादी ताकतें ताकतें, कुछ भी करने को तैयार हैं। दिखावटी दोस्ती, छल कपट, मक्कारी, डिप्लोमेसी, हथियार, हिंसा और विनाशकारी युद्धों के द्वारा ये ताकतें पूरी दुनिया पर अपना मनमाना कब्जा जमाना चाहती हैं। दुनिया को आपस में बांटने के लिए दो विश्व युद्ध भी हो चुके हैं जिसमें दुनिया की पूंजीवादी साम्राज्यवादी ताकतें आमने-सामने थीं।

दुनिया के तमाम शोषक, लुटेरे और पूंजीवादी इजारेदार मुल्क, समाजवादी सोच और व्यवस्था के सबसे बड़े दुश्मन बनकर दुनिया के सामने आ चुके हैं। पहले इन्होंने हिटलर के द्वारा सोवियत यूनियन पर हमला कराया था जिसे महान कामरेड स्टालिन की सूझबूझ और रूस की कम्युनिस्ट पार्टी की दूरदर्शिता ने हरा दिया था। फिर भी यह लड़ाई चोरी छुपे जारी रही। इसके बाद अमेरिका ने 72 देशों पर मनमाने हमले और सैन्य हस्तक्षेप किये, जिन्हें क्यूबा, वियतनाम, अफगानिस्तान, इराक, लीबिया, यूक्रेन, वेनेजुएला और अब ईरान पर मनमाने हमलों के रूप में देखा जा सकता है।

आज साम्राज्यवादी लुटेरी अमेरिकी सरकार पूरी दुनिया के प्राकृतिक संसाधनों जैसे सोना, चांदी, रेयर मिनरल्स, पेट्रोल, डीजल और गैस पर किसी भी तरह से कब्जा करने पर आमादा हो गई है। इसके अलावा साम्राज्यवादी लुटेरी और मुनाफाखोर सोच पूरी दुनिया पर अपना कब्जा बनाए रखना चाहती है। समता, समानता, न्याय, भाईचारे और मानवीय मूल्यों में उसका कोई विश्वास नहीं है। वह सारी दुनिया को अपने मनमाने नियंत्रण और कब्जे में बनाए रखना चाहती है।

समाजवादी व्यवस्था और सोच में उसका कभी भी यकीन नहीं रहा है। साम्राज्यवादी लुटेरी और अमानवीय व्यवस्था ने सबसे ज्यादा हमले और हस्तक्षेप समाजवादी देशों पर और समाजवादी नीतियों को लागू करने वाले नेताओं और देशों पर ही किये हैं जैसे सोवियत यूनियन, उत्तरी कोरिया, इराक, लीबिया, क्यूबा, चिली, बोलिविया, वैनेजुएला और अब इराक। क्योंकि समाजवादी सोच और मानसिकता सबको भोजन, मकान, कपड़ा, शिक्षा, स्वास्थ्य, सबको जमीन, सबको रोजगार और सबके सम्पूर्ण विकास में यकीन करती है। वह तमाम तरह के शोषण और मुनाफाखोरी पर पूरी रोक लगा देती है।

वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था समता, समानता, आपसी भाईचारे, सबको सच्चा न्याय, सबका विकास, सबको अनिवार्य रोजगार और सब की सामाजिक सुरक्षा में विश्वास करती है। वह हजारों साल से फैले तमाम तरह के शोषण, जुल्म , अन्याय, अत्याचार, सभी प्रकार के जुल्मों सितम और अनाचार का जड़ से खात्मा करने में विश्वास करती है और उसने समाजवादी देशों में यह सब करके भी दिखा दिया है, इसीलिए साम्राज्यवादी लुटेरी, शोषणकारी सोच और व्यवस्था इसको बिल्कुल भी पसंद नहीं करती। वह इससे सबसे ज्यादा भयभीत रहती हैं। आज दुनिया की अधिकांश साम्यवादी ताकतें जन कल्याणकारी नीतियों में विश्वास करती हैं तथा उनकों धरती पर उतारना चाहती हैं ताकि तमाम मेहनतकशों को बुनियादी अधिकार मोहिया कराये जा सकें जैसे ब्रिक्स के अधिकांश देश, ताकि सारी दुनिया की जनता का समुचित विकास हो सके और उन्हें सब प्रकार के शोषण और जुल्मों सितम से बचाया जा सके।

परंतु बेहद अफसोस की बात है कि अधिकांश शोषक, लुटेरे, पूंजीवादी, सामंती, जातिवादी और संप्रदायिक ताकतों के गठजोड़ को यह सब पसंद नहीं है। ये सब अमानवीय और शोषणकारी ताकतें साम्राज्यवादी अमेरिका की पिछलग्गू बन गई हैं और अमेरिक साम्राज्यवादी मुनाफाखोरी और प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए सारी दुनिया के तेल, पेट्रोल, डीजल एवं प्राकृतिक संसाधनों पर अपना मनमाना कब्जा करना चाहता है। पूरी दुनिया देख रही है कि वर्तमान में दुनिया में सबसे बड़ा अंतर विरोध पूंजीवादी साम्राज्यवाद और वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था के बीच में है। दुनिया की तमाम सांप्रदायिक, जातिवादी, धर्मांध और साम्राज्यवादी ताकतों का गठजोड़ नही चाहता कि किसी भी देश में या दुनिया के किसी भी कौने में, वैज्ञानिक समाजवाद और साम्यवाद की सोच, सिद्धांत और किसानों मजदूरों और मेहनतकशों की सरकार क़ायम हो और आगे बढ़ें, जनता के बीच में फूल फलें।

चीन को ईरान से तेल, पेट्रोल, डीजल और गैस न मिल सके और उसकी समाजवादी व्यवस्था को पूरी तरह से तहस-नहस किया जा सके, इसलिए अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर जान पूछकर और बिल्कुल मनमाने तरीके से ईरान पर झूठा, मनमाना, निराधार और भ्रामक हमला किया है। इस एकतरफा युद्ध को लेकर अमेरिका और इसराइल पूरी दुनिया को गुमराह कर रहे हैं। अमेरिका का सबसे बड़ा इरादा है ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना।

इस मनमाने हमले ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि अमेरिका का यूएनओ और अंतरराष्ट्रीय कानून और किसी भी प्रकार के नैतिक मूल्यों में कोई विश्वास नहीं है। उसने यूनएनओ और इंटरनेशनल कोर्ट आफ जस्टिस को, दुनिया की सबसे नकारा संस्थाएं बना दिया है। आज पूरी दुनिया देख रही है कि अमेरिका का राष्ट्रपति ट्रंप, दिन-रात झूठ बोल रहा है, पूरी दुनिया को गुमराह कर रहा है और यह बेहद अफसोस जनक बात है कि दुनिया के अधिकांश देश चुप हैं और उनका विरोध नहीं कर रहे हैं सिर्फ चीन, नॉर्थ कोरिया रूस ही खुलकर अमेरिका के मनमाने हमलों का विरोध कर रहे हैं। अमेरिका ने लोकतंत्र/जनतंत्र को झूठतंत्र, धनतंत्र और युद्धतंत्र में बदल दिया है और पूंजीवादी जनतंत्र, पूरी दुनिया के मुनाफाखोर लुटेरे पूंजीपतियों का मोहरा बन गया है। उसका दुनिया की तमाम मानवीय समस्याओं, दुख दर्द, शोषण, अन्याय और गरीबी का खात्मा करने में कोई विश्वास नहीं है। यह भी बेहद अफसोस की बात है कि पूंजीवादी कॉरपोरेट मीडिया ईरान युद्ध की सच्चाई को पूरी दुनिया के सामने नहीं ला रहा है।

इन विपरीत परिस्थितियों में, देश और दुनिया की तमाम जनता, मेहनतकशों, किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, लेखकों, कवियों और संस्कृति कर्मियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हो गई है कि वे सब शिक्षित, संगठित और एकजुट होकर, समता-समानता विरोधी, सबको शिक्षा-सबको काम विरोधी, जनता के जनतंत्र और समाजवाद विरोधी, युद्धोन्माद, वैश्विक प्रभुत्वकारी, जनता के जनतंत्र विरोधी, मुनाफाखोर साम्राज्यवादी ताकतों का जोरदार विरोध करें और उनके मंसूबों को पूरी तरह से नाकाम करने के अभियान में शामिल हों।

मेहनतकशों की एकजुटता जिंदाबाद,

साम्राज्यवाद मुर्दाबाद,

इंकलाब जिंदाबाद।

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