अंधविश्वास : रोग और इलाज

अंधविश्वास : रोग और इलाज

 

अशोक भाटिया

 

अंधविश्वासों की जड़ें जमाने का काम दुनिया के सभी धर्मों ने किया है। दरअसल सत्ता, सम्पत्ति और स्वार्थ की तिकड़ी ही अंधविश्वासों का झंडा बुलन्स करती है. बिना यह जाने कि इससे हमारा समाज कितना पिछड़ जाता है। हमारा ‘रामचरितमानस’ ग्रंथ अनेक अंधविश्वास जमाने-बढाने का काम करता रहा है। मन की गति से भी तेज़ उड़ने वाले पुष्पक विमान को, अंधविश्वास के कारण, आज भी सच मानने वाले लोग हैं, जबकि विमान बनाने और उसे उड़ाने के लिए एक आधारभूत ढाँचा तो चाहिए, जिसका कोई ज़िक्र ‘रामचरितमानस में नहीं है। रामसेतु भी नल-नील ने नहीं बनाया, जैसा कि प्रचार मिलता है। यह 17.5 लाख वर्ष पूर्व प्राकृतिक प्रक्रिया से बना है। समुद्र में पाए जाने वाले मूँगा (CORAL) में कैल्शियम कार्बोनेट होता है, जिसके छोड़े जाने से रामसेत्र बना है। यह 30 किलोमीटर लम्बी श्रृंखला है। विश्व में मूँगा से बनी ऐसी दस श्रृंखलाएँ हैं। सबसे बड़ी आस्ट्रेलिया के समुद्र तट पर क्वीसलैंड में है, जो 2300 किलोमीटर लम्बी है। यह भी बता दें कि 4500 ई. पूर्व से 500 ई. पूर्व के बीर चित्रलिपि का विकास हुआ। तो नल-नील ने उससे भी पहले राम नाम लिखना

कहां से सीख लिया?

कहाँ से सीख लिया ?

और ‘महाभारत’ तो उससे भी चार कदम आगे है। कर्ण सूर्य और कुन्ती का पुत्र है। क्या आग का गोला किसी मनुष्य को जन्म दे सकता है?

ब्रह्मा के चार सिर थे- क्या यह संभव है? यह केवल मिथक और प्रतीक है। श्रृंगी ऋषि हिरण से पैदा हुए, हनुमान कान से, करण सूर्य से पैदा हुए, गणेश मैल से और जनक पिता की जाँघ से पैदा हुए, सीता घड़े से और राम-लक्ष्मण आदि खीर खाने से पैदा हुए, लव-कुश घास से और मकरध्वज मछली से पैदा हुए- कितनी हवाई बातें हैं, जो पाठकों का दिमाग खराब कर उनकी सोच को कुन्द करती हैं।

धूर्त और मूढ़मति – दोनों तरह के राजनेता कुर्सी के लिए अंधविश्वासॉ फैलाते हैं। पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश के एक नेता ने कहा कि मोर के आँसुओं से मोरनी गर्भवती होती है। इसी झूठ को एक साध्वी ने भी धर्मसभा में कहा। इसीलिए हमें विवेक से काम लेने की बड़ी जरूरत है।

 

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