कविता
जीवन की सच्चाई
कुमारी शिल्पा “राजपूत”
रोने से अगर दुख मिट जाते,
सारे जग में रोना होता,
आँसुओं की नदियों में फिर
हर इक ग़म को धोना होता।
जीवन की राहों में लेकिन
काँटे ही काँटे आए हैं,
कौन यहाँ इस धरती पर
सपनों के सब फूल पाए हैं?
जब-जब घिरती है अँधियारी,
नव प्रभात का गीत रचती,
टूटे मन को बल दे जाती,
आत्मा को नव शक्ति देती।
दुख की घड़ियों में जी भर रो,
मन का बोझ उतार लेना,
सूखे आँसू, उठते कदम,
नई उमंग से चल देना।
बड़े पुण्य से मानव जीवन
तुमने इस धरती पर पाया,
जो हँसकर पी लेता पीड़ा,
वही सच्चा जीवन जी पाया।

वाह वाह बहुत सुन्दर सृजन। बेहतरीन प्रस्तुति।
हार्दिक बधाई।
डॉ. अशोक मधुप