मंजुल भारद्वाज की कविता- वो कौन हैं?

कविता

वो कौन हैं?

– मंजुल भारद्वाज

 

हम कहां रहते हैं?

कैसे रहते हैं?

क्यों रहते हैं?

इसका निर्णय कौन लेता है?

 

यह गांव को रौंदकर

शहर कौन बसाता है?

 

वो कौन है

जो घर को

चारदीवारों में

बदल देता है?

 

वो कौन है जो

घर का अर्थ

1बेडरूम ,2 बेडरूम

3बेडरूम किचन हॉल बना देता है?

 

वो कौन है जो

घर का नामकरण

अपार्टमेंट,बिल्डिंग

बंगला ,झोपड़पट्टी रख देता है ?

 

वो कौन है

जो घर का सपना संजोते हैं

ईंट पत्थर की चारदीवारी को

ईएमआई पर खरीद लेते हैं

पर घर नहीं बना पाते ?

 

वो कौन है

जो जीवन भर

घर का सपना

आंखों में सजाए

अपनी आंखें मूंद

दुनिया से चले जाते हैं?

 

वो कौन हैं

जो धरती का बिछौना कर

आकाश ओढ़ लेते हैं?

 

वो कौन हैं

जो घर सजाते हैं

दीवारों को घर बनाते हैं

जीवन के रंगों से

हर घर सजाते हैं?

 

वो कौन हैं जो

एक गांव

एक शहर

एक बस्ती

बसाते हैं ?

 

वो कौन हैं

जो मनुष्य की पहचान

अस्तित्व को मिटा

मनुष्य को

एक भीड़ में बदल देते हैं ?

 

वो क्या है

कौन है

जो मनुष्य को

एक दौड़ने वाली मशीन बना देते हैं ?

 

वो कौन हैं

जो घर बनाते हैं?

वो कौन हैं

जो घर का सपना बेच

मुनाफ़ा कमाते हैं?

 

वो कौन हैं

जो भीड़ बने

मनुष्य को अपने अंतरंग से जोड़

इंसान बना देते हैं?