लहलहाती खेती
जगतार सिंह सिद्धू
फसलों से लदे पंजाब के हरे-भरे खेत, शांति और खुशहाली से परिपूर्ण पंजाब का संदेश देते हैं! भारी बारिश के बाद, मीलों दूर तक गेहूं की फसल लहलहाती दिखाई दे रही है। गांवों और कस्बों में, सुबह-शाम गुरु घरों में सबकी भलाई के लिए गुरबानी का संदेश सुनाई देता है। अगर आप पंजाब की उपजाऊ ज़मीन को देखें, तो आपको खेतों में फसलों को बर्बाद करते खरपतवार नहीं दिखेंगे, न ही खेतों में खड़े किसानों के चेहरों से इंसानियत को मारने वाली नफरत की बदबू आती है। मेरे पुरखे कहते हैं कि यह रवायत सदियों से चली आ रही है।
कुछ दिन पहले मैं चंडीगढ़ से अपने गांव भाई रूपा गया था। चारों तरफ हरे भरे लहलहाते खेत पंजाब वासियों की सकारात्मक ऊर्जा को दर्शाते हैं। कहीं कोई अपने जानवरों के लिए हरा चारा ला रहा है तो कोई खेती का दूसरा काम कर रहा है। जब भी गांव जाता हूं, तो संगत में बैठे लोगों से ज़रूर मिलता हूं। मैं संगत को उनके बुज़ुर्गों के साथ नमन करता हूं, जो सदियों से भाईचारे की विरासत का एक मज़बूत स्तंभ रहे हैं।
उस दिन गुरु रविदास जी की जयंती थी। सड़कों पर लंगर सेवा। हाथ जोड़कर लंगर मांगना पंजाबियों की विरासत है। संगरूर के पास संत अतर सिंह जी को समर्पित एक समारोह में सड़क के दोनों ओर मीलों तक गाड़ियों और ट्रैक्टर ट्रॉलियों की लाइनें लगी हुई थीं! मुझे अपने पत्रकार के दिन भी याद आ गए। पंजाब विधानसभा चुनाव थे। पंजाबियों से ज़्यादा समय बात करने की इच्छा से, मैं सुबह बिना कुछ खाए-पिए अपनी जगह से निकल गया। सड़क पर थोड़ा और आगे बढ़ा तो जगह-जगह लंगर मिल रहा था। गुरुपर्व था। हमेशा की तरह, संगत हाथ जोड़कर लंगर परोस रही थी। सबकी सेवा कर रही थी।
कभी-कभी चंडीगढ़ के सीनियर जर्नलिस्ट सरबजीत सिंह धालीवाल और इंदरप्रीत सिंह मेरे साथ किसी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने जाते थे। जब भी उन्हें मौका मिलता, वे अक्सर गुरुद्वारा साहिब जाकर लंगर खाते थे। अब जब मैं खेतों में उगती फसलें देखता हूं, तो पंजाबियों की बात करना ज़रूरी है, लेकिन पंजाब के खेत भी इंसानियत की भलाई का संदेश दे रहे हैं। मुझे लगता है कि पंजाब की उपजाऊ ज़मीन पर इंसानियत की भलाई के लिए उगाई जाने वाली खेती से बड़ा देशभक्ति वाला आधार कार्ड पहचान के लिए क्या हो सकता है? यह बाबा नानक की खेती है, जो सदियों से उग रही है और हमेशा उगती रहेगी!

लेखक – जगतार सिंह सिद्धू
