विज्ञान दिवस पर डॉ रणबीर सिंह दहिया की तीन हरियाणवी रागनी

विज्ञान दिवस पर डॉ रणबीर सिंह दहिया की तीन हरियाणवी रागनी

 

 

1.

वैज्ञानिक नजर

वैज्ञानिक नजर के दम पै जिन्दगी नै समार लिये।।

जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।

1

सादा रैहणा उचे विचार साथ मैं पौष्टिक खाणा यो

मानवता की धूम मैच चाहिये इसा संसार बसाणा यो

सुरग की आड़ै नरक की आड़ै ना कितै और ठिकाणा यो

पड़ौसी की सदा मदद करां दुख सुख मैं हाथ बंटाणा यो

धरती सूरज चौगरदें घूमै ब्रूनो नै सही प्रचार किये।।

जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।

2

साच बोलणा चाहिये पड़ै चाहे थोड़ा दुख बी ठाणा रै

नियम जाण कुदरत के इसतै चाहिये मेल बिठाणा रै

हाथ और दिमाग तै कामल्यां चाहिये दिल समझाणा रै

गुण दोष तै परखां सबनै अपणा हो चाहे बिराणा रै

जांच परख की कसौटी पै चढ़ा सभी संस्कार लिये।।

जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।

3

इन्सान मैं ताकत भारी सै नहीं चाहिये मोल घटाणा

सच्चाई का साथ निभावां पैड़े चाहे दुख बी ठाणा

लालची का ना साथ देवां सबनै चाहिये धमकाणा

मारकाट की जिन्दगी तै ईब चाहिये पिंड छटवाणा

पदार्थ तै बनी दुनिया इसनै चीजां को आकार दिये।।

जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।

4

दुनिया बहोतै बढ़िया इसनै चाहते सुन्दर और बणाणा

जंग नहीं होवै दुनिया मैं चाहिये इसा कदम उठाणा

ढाल-ढाल के फूल खिलैं चाहिये इनको आज बचाणा

न्यारे भेष और बोली दुनिया मैं न्यारा नाच और गाणा

शक के घेरे मैं साइंस नै रणबीर सिंह सब डार दिये।।

जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।

**2**

 

ज्ञान विज्ञान का पैगाम

सुखी जीवन हो म्यारा ज्ञान विज्ञान का पैगाम सुणो।।

हरियाणे के सब नर-नारी ध्यान लगाकै तमाम सुणो।।

1

सारे पढ़े लिखे होज्यां नहीं अनपढ़ टोहया पावै फेर

खाण पीण की मौज होज्या ना भूख का भूत सतावै फेर

बीर मरद का हक बरोबर हो इसा रिवाज आवै फेर

यो टोटा गरीब की चौखट पै भूल कै बी ना जावै फेर

सोच समझ कै चालांगे तो मुश्किल ना सै काम सुणो।।

हरियाणे के सब नर-नारी ध्यान लगाकै तमाम सुणो।।

2

मिलकै नै सब करां मुकाबला हारी और बीमारी का

बरोबर के हक होज्यां तै ना मान घटै फेर नारी का

भाईचारा फेर बढ़ैगा नहीं डर रहै चोरी जारी का

सुख कै सांस मैं साझा होगा इस जनता सारी का

भ्रष्टाचार की पूरी तरियां कसी जावै लगाम सुणो।।

हरियाणे के सब नर-नारी ध्यान लगाकै तमाम सुणो।।

3

आदर्श पंचायत बणावां हरियाणा मैं न्यारी फेर

दांतां बिचालै आंगली देकै देखै दुनिया सारी फेर

गाम स्तर पै बणी योजना लागू होज्या म्हारी फेर

गाम साझली धन दौलत सबनै होज्या प्यारी फेर

सुख का सांस इसा आवैगा नां बाजै फेर जाम सुणो।।

हरियाणे के सब नर-नारी ध्यान लगाकै तमाम सुणो।।

4

कोए अनहोनी बात नहीं ये सारी बात सैं होवण की

बैठे होल्यां लोग लुगाई घड़ी नहीं सै सोवण की

इब लड़ां ना आपस मैं या ताकत ना खोवण की

बीज संघर्ष का बोवां समों सही सै बोवण की

कहै रणबीर गूंजैगा चारों कूठ यो नाम सुणो।।

हरियाणे के सब नर-नारी ध्यान लगाकै तमाम सुणो।।

 

*3**

 

वैज्ञानिक दृष्टि

वैज्ञानिक दृष्टि बिन सृष्टि नहीं समझ मैं आवै।।

कुदरत के नियम जाण कै समाज आगै बढ़ पावै।।

1

किसनै सै संसार बणाया किसनै रच्या समाज यो

म्हारा भाग कहैं माड़ा बांधैं कामचोर कै ताज यो

सरमायेदार क्यों लूट रहया सै मेहनतकश की लाज यो

क्यों ना समझां बात मोटी कूण म्हारा भूत बणावै।।

कुदरत के नियम जाण कै समाज आगै बढ़ पावै।।

2

कौण पहाड़ तोड़ कै करता धरती समतल मैदान ये

हल चला खेती उपजावै उसे का नाम किसान ये

कौण धरा चीर कै खोदै चांदी सोने की खान ये

ओहे क्यों कंगला घूम रहया चोर बण्या धनवान ये

करमां के फल मिलै सबनै क्यों कैहकै बहकावै।।

कुदरत के नियम जाण कै समाज आगै बढ़ पावै।।

3

हम उठां अक अनपढ़ता का मिटा सकां अन्धकार यो

हम उठां अक जोर जुलम का मिटा सकां संसार यो

हम उठां अक उंच नीच का मिटा सकां व्यवहार यो

जात पात और भाग भरोसे कोण्या पार बसावै।।

कुदरत के नियम जाण कै समाज आगै बढ़ पावै।।

4

झूठ्यां पै ना यकीन करां म्हारी ताकत सै भरपूर

म्हारी छाती तै टकरा कै गोली होज्या चकनाचूर

जागते रहियो मत सोइयो म्हारी मंजिल ना सै दूर

सिरजन होरे हाथ म्हारे सैं घणे अजब रणसूर

नया समाज सुधार का रणबीर रास्ता सही बतावै।।

कुदरत के नियम जाण कै समाज आगै बढ़ पावै।।

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