White Man’s Burden!
सभ्यता का ठेका
कभी दुनिया में एक महान विचार पैदा हुआ था—कि इंसानियत को सुधारने का जिम्मा कुछ खास लोगों को दे दिया जाए।
और संयोग देखिए, यह जिम्मा उन्हीं लोगों ने खुद ही उठा लिया!
इस महान मिशन का नाम रखा गया — The White Man’s Burden, जिसके रचयिता थे Rudyard Kipling।
मतलब साफ था: दुनिया के “भूरे” और “काले” लोग बेचारे हैं, उन्हें सभ्यता सिखाने के लिए “गोरे साहब” आएँगे।
जैसे कोई डॉक्टर जंगल में भटके मरीजों को दवा देने आया हो!
लेकिन इतिहास बड़ा शरारती होता है—वह बातें कम और करतूतें ज्यादा याद रखता है।
सभ्यता का पाठ पढ़ाने वाले वही महान लोग जब अपने आलीशान महलों में पकड़े जाते हैं तो वहाँ से Jeffrey Epstein जैसे किरदार निकल आते हैं—जहाँ मासूम लड़कियों को “सभ्यता-शिक्षा” कुछ अलग ही तरीके से दी जाती है! यौन शोषण की दरिंदगी सारी हदें पार कर जाती हैं!
High and Mighty of the world are found indulging in most Heinous and Goriest sex perversions!
और फिर वही मानवता के संरक्षक कहीं मासूम स्कूल बच्चियों का ” नर संहार ” करते मिलते हैं
दुनिया को शांति सिखाने वाले वही लोग जब अपने जहाज़ और मिसाइलें उड़ाते हैं तो धरती के अलग-अलग कोनों में अचानक “लोकतंत्र” बरसने लगता है – लोकतंत्र की बरसात होने लगती है —
और मानवता चित्कार कर उठती है!
कमाल यह है कि हर बार घोषणा भी बड़ी पवित्र होती है—
“हम यह सब मानवता की रक्षा के लिए कर रहे हैं!”
मानवता बेचारी शायद आज तक यह समझ ही नहीं पाई कि उसकी रक्षा हो रही है या उसकी परीक्षा।
दरअसल दुनिया का सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि
जो लोग खुद को सभ्यता का शिक्षक बताते हैं,
वे अक्सर इतिहास की क्लास में सबसे ज्यादा नकल करते पकड़े जाते हैं।
और तब लगता है कि “White Man’s Burden” असल में दुनिया का उन पर बोझ नहीं था—
बल्कि ये दुनिया पर एक बोझ थे और हैं!
इतिहास की अदालत बड़ी दिलचस्प होती है।
वहाँ फैसले धीरे-धीरे आते हैं,
लेकिन जब आते हैं तो किताबों में लिखा जाता है—
सभ्यता का सबसे बड़ा दावा अक्सर
सभ्यता का सबसे बड़ा व्यंग्य बन जाता है।
सुप्रभात!
