के. एन. पनिक्कर को जलेस की श्रद्धांजलि

जाने-माने इतिहासकार, शिक्षाविद्, लेखक और सामाजिक विचारक के. एन. पनिक्कर नहीं रहे। वे आगामी 26 अप्रैल 2026 को 90 वर्ष के होने वाले थे। वे आधुनिक भारतीय इतिहास, औपनिवेशिक काल के बौद्धिक और सांस्कृतिक इतिहास, साम्प्रदायिकता की आलोचना और धर्मनिरपेक्ष इतिहास लेखन के लिए जाने जाते थे।
उन्होंने विक्टोरिया कॉलेज (पलक्कड़) और राजस्थान विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी। कैरियर की शुरुआत उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक के रूप में की थी। आगे चलकर वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे। वहां उन्होंने आधुनिक भारतीय इतिहास के अध्ययन में प्रगतिशील और मार्क्सवादी दृष्टिकोण को मजबूत किया। वे श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, केरल के कुलपति रहे। केरल काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च के संस्थापक अध्यक्ष और केरल स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के पहले उपाध्यक्ष भी रहे।
उन्होंने इतिहास को मिथकों से अलग रखने और वैज्ञानिक-धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण पर जोर दिया। वे ‘आउटसाइडर ऐज एनिमी’ जैसी अवधारणाओं पर लिखते थे, जहां उन्होंने सांप्रदायिक इतिहास में ‘बाहरी’ को दुश्मन बनाने की राजनीति की आलोचना की। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, किसान विद्रोह और केरल के इतिहास पर भी महत्वपूर्ण कार्य।
के. एन. पनिक्कर को भारत के सबसे प्रभावशाली इतिहासकारों में गिना जाता है जिन्होंने प्रगतिशील इतिहास दृष्टि को आकार दिया और साम्प्रदायिकता के खिलाफ बौद्धिक संघर्ष में सक्रिय रहे। उनका निधन इतिहास और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति है। जनवादी लेखक संघ उनके निधन पर शोक व्यक्त करता है और उनकी स्मृति को नमन करता है।
