जनवादी लेखक संघ कुरुक्षेत्र ने किया कविता पाठ और विचार-चर्चा का आयोजन
ओम सिंह अशफ़ाक ने अपने वक्तव्य और कविता- कथा सुनो भई कथा सुनो- के माध्यम से साम्प्रदायिक/काली ताकतों के पाखंड और झूठ को बेनकाब किया
कुरुक्षेत्र जलेस कविता पाठ तानाशाही
लेखकों ने कहा- तानाशाही और विध्वंस के दौर से गुजर रही है दुनिया
कुरुक्षेत्र। डॉ ओ. पी. ग्रेवाल अध्ययन संस्थान- कुरुक्षेत्र में एक विचार गोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन जनवादी लेखक संघ-कुरुक्षेत्र द्वारा किया गया जिसकी अध्यक्षता अनुपम शर्मा और वरिष्ठ कवि ओम सिंह अशफ़ाक ने की। मंच संचालन जलेस के राज्य अध्यक्ष जयपाल ने किया।
कविता और वैश्विक परिदृश्य विषय पर बातचीत रखते हुए जलेस अध्यक्ष जयपाल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस समय विश्व युद्ध, हिंसा-मारकाट, नरसंहार,विभिन्न देशों और मानव समुदाय के बीच नफ़रत/शत्रुता, फासीवादी उभार और साम्राज्यवादी-पूंजीवादी तानाशाही के दौर से गुजर रहा है और सदियों के श्रम से अर्जित मानव मूल्यों को ध्वस्त करने का प्रयास अमेरिका द्वारा किया जा रहा है जिसका मुकाबला प्रगतिशील जनवादी शक्तियों को मिलकर करना होगा l
वरिष्ठ कवि हरपाल गाफिल ने कहा कि मनुष्य की स्वाभाविकता को बचाया जाना कविता की सबसे बड़ी चुनौती है जबकि डॉ ओम प्रकाश करुणेश का मानना था कि मनुष्य की संवेदना ही कविता है जिसे हम अपने काव्यात्मक शब्दों में व्यक्त करते हैं।
वरिष्ठ जनवादी कवि ओम सिंह अशफ़ाक ने अपने वक्तव्य और कविता- कथा सुनो भई कथा सुनो- के माध्यम से साम्प्रदायिक/काली ताकतों के पाखंड और झूठ को बेनकाब किया। युवा कवयित्री और जलेस अंबाला की अध्यक्ष अनुपम शर्मा ने ‘जंगल अभी जिंदा है’ कविता के माध्यम से वर्तमान पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री के साथ अमानवीय और दोयम दर्जे के व्यवहार को आज के समय की विडंबना बताया। उभरते युवा कवि कपिल भारद्वाज ने पिकासो की एक प्रसिद्ध पेंटिंग के माध्यम से हिंसात्मक शक्तियों के द्वारा कुचली जाती मानवीय संवेदनाओं को अपनी कविता में बहुत ही मार्मिकता के साथ व्यक्त किया l जलेस संयोजक मंजीत सिंह ने अपनी कविता में मानवीय संघर्ष और श्रम के महत्त्व को प्रतिपादित करते कहा कि हमें अपने आशा और विश्वास को कठिन समय में भी छोड़ना नहीं चाहिए।
डॉ सुभाष गर्ग ने सामाजिक समस्याओं को उठाते हुए देश की चुनौतियों को सामने रखा और अपनी दो कविताओं को तरुननम में गाकर सबका मन मोह लिया। बलदेव सिंह महरोक ने दुनियाभर में मज़हबों के आपसी टकराव पर तीखे व्यंग्य किए ।
उदीयमान युवा कवि गौरव सिंह और विनोद कुमार ने अपने वक्तव्य और कविता के माध्यम से इस विमर्श को समृद्ध किया। इस आयोजन में प्रिंसिपल नरेश नागपाल का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम के बाद सांगठनिक सत्र भी हुआ जिसमें सक्रिय सदस्यों ने भागीदारी की । इस मीटिंग में जलेस कुरुक्षेत्र इकाई के भावी कार्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया गया

