Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

मंजुल भारद्वाज की कविता- तर्कहीन सत्ता

कविता तर्कहीन सत्ता मंजुल भारद्वाज   ज़हन में सवाल हथौड़े मार रहा है क्या दुनिया वाक़ई पढ़ी लिखी है?  …

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मुनेश त्यागी की कविता- हम बनेंगी विद्रोहिनी हर जुल्मों सितम के खिलाफ

कविता हम बनेंगी विद्रोहिनी हर जुल्मों सितम के खिलाफ मुनेश त्यागी   अब हर सीता को कर देना चाहिए इंकार…

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ओमप्रकाश तिवारी की कविता- बेहया का कथन

कविता बेहया का कथन ओमप्रकाश तिवारी बेहया को बेहया एकदम नहीं कहा जाना चाहिए उसकी जीजीविषा का सम्मान किया जाना…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- आस्था के कीचड़ का कमल

कविता आस्था के कीचड़ का कमल मंजुल भारद्वाज   पद व्यक्ति का विकार दूर नहीं करता अपितु विकारी व्यक्ति पद…

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राजकुमार कुम्भज की चार कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की चार कविताऍं.   1. स्मृतियों की राह में कविता.   कविता नहीं है राख का ढ़ेर भीतर…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- धर्म,जात और राष्ट्रवाद !

कविता धर्म,जात और राष्ट्रवाद ! मंजुल भारद्वाज   विश्व की अखंडता समग्रता और विविधता का समूल नाश करने का षड्यंत्र…

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मुनेश त्यागी की कविता- चाहतें उनकी और हमारी

कविता चाहतें उनकी और हमारी मुनेश त्यागी     हमारी चाहत है, रोटी, कपड़ा और मकान। वो चाहते हैं, हिंदू…