Blogआलेख विचारकोर्ट

देश की न्यायपालिका नागरिकों को निराश कर रही है. जब आज़ादी खतरे में होती है, तब जज आंखें फेर लेते हैं

यह लेख जाने माने प्रिंट और टेलीविजन पत्रकार वीर सांघवी ने लिखा है। इस लेख में न्यायपालिका की वर्तमान स्थिति,…

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तर्क, आस्था और सोचने की आज़ादी: एक बहस, जो स्टूडियो से निकलकर समाज तक जाएगी

तर्क, आस्था और सोचने की आज़ादी: एक बहस, जो स्टूडियो से निकलकर समाज तक जाएगी धर्मेन्द्र आज़ाद अभी हाल में…