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मंजुल भारद्वाज की कविता- आंसुओं में मुस्कुराते हुए !

कविता आंसुओं में मुस्कुराते हुए ! -मंजुल भारद्वाज   एक कला संकल्प एक उन्मुक्त कला विचार एक नाटय दर्शन एक…

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थियेटर ऑफ़ रेलेवंस नाट्य दर्शन ने तोड़ी भ्रांतियां

थियेटर ऑफ़ रेलेवंस नाट्य दर्शन ने तोड़ी भ्रांतियां कला : रूढ़िवाद, पाखंड और भगवान का वरदान  मंजुल भारद्वाज   मनुष्य…