हरियाणा : जूझते जुझारू लोग – 77
सुमनमाला – संवेदनशील एवं समर्पित नेत्री
हिसार जिले की निवासी श्रीमती सुमन माला का जन्म 21 नवम्बर 1956 को हुआ। 10+2 व जे.बी.टी. के बाद सुमन जी ने 10 अगस्त 1983 को अस्थाई शिक्षिका व 1 नवम्बर 1986 को स्थाई शिक्षिका के रूप में कार्यग्रहण किया। सेवा में आते ही बहन संगठन की आम सदस्य बन गई थी।
जीवन साथी श्री दिलबाग सिंह रोडवेज की यूनियन में सक्रिय थे। इसलिए परिवार का साथ मिलने पर पदाधिकारी के तौर पर भी लंबे समय काम किया। सन् 2006-08 खण्ड स्तर, 2008-11 जिला हिसार की वरिष्ठ उपप्रधान के तौर पर व 2011 से सेवानिवृत्ति 30 नवम्बर 2014 तक राज्य की उपप्रधान के तौर पर बड़ी सक्रियता से संगठन के कार्य किये। सुमनमाला जी उन कार्यकर्ताओं में शामिल हैं जिन्हें महिला होने के कारण कभी काम करने में संकोच नहीं हुआ। वे खण्ड प्रधान के रूप स्वतंत्र रूप से स्कूलों में जाती। निस्संकोच शिक्षक साथियों के समक्ष यूनियन का एजेंडा रखती। चंदे अथवा सदस्यता के लिए अपील करती। उनका प्रभाव किसी अन्य पुरुष कार्यकर्ता से कम नहीं पड़ता था।
इस दौरान बहन सुमन ने 1986 से 2014 तक के सभी प्रदर्शनों, रैलियों, बैठकों, जेल भरो इसे कार्यक्रमों में बहादुरी के साथ हिस्सेदारी की। शिक्षक व शिक्षा हित के इन आंदोलनों में भागीदारी के देत 9 अर्जित अवकाश भी कटवाए। उन्हें किसी जटिल स्थिति में काम करने में संकोच नहीं होता था। जरूरत पड़ती तो पुलिस-प्रशासन से साहस के साथ उलझ जाती। अध्यापक लहर पत्रिका के पाठक बनाने, हिसार खण्ड-1 में सदस्यता, संघर्ष फण्ड, फील्ड प्रचार में सराहनीय योगदान रहा।
वे इन्सान के रूप बहुत संवेदनशील और केयरिंग स्वभाव की हैं। संगठन में रहते हुए अपने साथियों के निजी जरूरतों और कष्टों के प्रति हमेशा सहयोगपूर्ण रहती। यहाँ तक हिसार के साथी उनके पास घर जाकर भी अपनी बातें निस्संकोच रख पाते थे। एस.टी.एफ.आई. के हिसार सम्मेलन के मौके पर तैयारियों के दौरान मैं थोड़ा अस्वस्थ था। संघ के कार्यालय में मैं और भारती जी रूके हुए थे। सुमनमाला और दिलबाग सिंह के आग्रह पर दो-तीन दिन उनके घर पर ही रहे। उस दौर और नजदीक से अहसास हुआ कि वे कार्यकर्ताओं के प्रति उतना ही लगाव रखती थी जैसे कोई बहन अपने भाइयों से स्नेह रखती है।
वर्तमान में सेवानिवृत्ति के बाद अपने जीवन साथी दिलबाग सिंह के साथ आप अपने पुत्र व पुत्रवधू के पास कनाडा में रहते हैं।
