सर छोटू राम: एक अलग तरह के वकील
डॉ. रामजीलाल
कानून डिग्री :सन् 1911
सन् 1905 में दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के पश्चात सर छोटू राम ने सन् 1906 में लॉ कॉलेज, लाहौर(इवनिंग शिफ्ट )में दाखिला लिया और रंग महल मिशन हाई स्कूल (लाहौर) में अध्यापन का कार्य भी करने लगे। परन्तु लाहौर छोड़ कर सन् 1908 में आगरा के लॉ कॉलेज (आगरा) में प्रवेश लिया और सन् 1911 में प्रथम श्रेणी में कानून की परीक्षा उतीर्ण की. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधीन आगरा (यूपी) के जिला न्यायालय में वकालत करने हेतु वकील के रूप में पंजीकरण करवाया. एक वर्ष की अवधि में ही वह दीवानी और फौजदारी (Civil and Criminal )मामलों के जाने माने वकीलों की श्रेणी में सम्मिलित हो गए.यह एक वर्ष उनके जीवन में मील का पत्थर साबित हआ क्योंकि उन्हें ग्रामीण परिवेश से आने वाले मुवक्किलों के साथ न्यायालय परिसर में वकीलों द्वारा की जाने वाली धोखा- धड़ी का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ. छोटू राम को यह ताने भी सुनने पड़े कि इनको ऱोहतक तो कोई नहीं पूछता इसलिए तो मेरठ में वकालत कर रहे हैं.
रोहतक में वकालत : 13 अप्रैल 1912
सर छोटू राम पेशे से वकील थे और उनकी सोच पर ‘हितोपदेश’ के एक श्लोक का बहुत प्रभाव था. हितोपदेश के श्लोक के अनुसार प्रतिदिन हजारों लोग जन्म लेते हैं, लेकिन वास्तविक जन्म उसी का होता है जिसके जन्म से मानव जाति का उत्थान होता है. अन्य शब्दों में, मानव जाति के उत्थान के लिए अच्छे मानवीय गुणों का होना बहुत जरूरी है. उन पर बचपन से ही सामाजिक सरोकार की सोच हावी थी. इसलिए उन्होंने वकालत और राजनीति को व्यक्तिगत लाभ और विलासिता के स्थान पर आम जनता की सेवा, सहायता और कल्याण का माध्यम बनाया.
आगरा और रोहतक में अपनी प्रैक्टिस की शुरुआत में, कोर्ट परिसर में उन्होंने जो माहौल देखा, वह बहुत दर्दनाक और चौंकाने वाला था. उन्होंने अनुभव किया कि ज़्यादातर वकील अपने क्लाइंट का फ़ायदा उठाने के लिए झूठ, धोखा,फरेब,प्रपंच ,धोखाधड़ी और गलत तरीकों का इस्तेमाल करते थे और उनका व्यवहार अमानवीय और शोषण करने वाला था. वे वकील की पहचान माने जाने वाले ‘काले कोट की आड़’ में गैर-कानूनी(काले काम) करते थे.
सर छोटू राम ने अपनी पुस्तक बाजारे ठगी की सैर में तत्कालीन न्यायिक व्यवस्था में अदालतों के अधिकारियों, न्यायाधीशों, वकीलों के दलालों ,अहलदार, मुंशी ,वकील ,अर्जीनवीस ,जजों के रीडर , नम्बरदार व अन्य की ऐसी सुदृढ़ कतार का वर्णन किया है जो अमानवीयता व असंवदेनशीलता की भावना से परिपूर्ण थी. उनके हृदय मे गरीब मुवक्किल के प्रति भी असंवेदनशीलता थी. छोटूराम ने इसको ग्रामीण मुवक्किल का ‘मुंडन संस्कार’ के नाम से पुकारा है.
सर्वगुण संपन्न वकील :
छोटू राम ने सन् 1912 में रोहतक में तत्कालीन प्रसिद्ध वकील चौ.लालचंद के साथ वकालत शुरू की. वह एक मानवतावादी वकील थे. उनको इंग्लिश भाषा पर महारत हासिल थी. उनकी विशेष विश्लेषणात्मक क्षमता, तार्किकता, बेहतरीन संचार कौशल, रचनात्मक सोच, काबिलियत और समझ बहुत अधिक विशेष गुण थे. संचार कौशल के कारण एक अच्छा वकील स्पष्ट,सुदृढ़ व अपने तर्कों को इस ढंग से प्रस्तुत करता है कि न्यायाधीश और मुवक्किल स्पष्ट रूप से समझ सकें. उसके सभी तर्क लिखित होने चाहिए और केस की पैरवी करते समय उन में इतनी स्पष्टता व सुदृढ़ता होनी चाहिए कि न्यायाधीश को उसकी बात स्पष्ट समझ में आ जाए व उसके पक्ष में फैसला देने के लिए मजबूर हो जाए. इसके अतिरिक्त उनके तर्कों में कानून के साथ-साथ उच्चतर न्यायालयों के द्वारा दिए गए निर्णय के पूर्व दृष्टांत भी सम्मिलित होना चाहिए. इन सभी खूबियों के साथ, एक वकील का मुवक्किल के प्रति मानववादी दृष्टिकोण होना चाहिए, यानी कि उदार, ईमानदार, गोपनीयतापूर्ण और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए. इस दृष्टि से सर छोटू राम सर्वगुण संपन्न वकील और बेहतरीन इंसान थे.
मुख्य बातें:
सर छोटू राम के वकील के रूप में मुख्य बातों का वर्णन अग्रलिखित है:
प्रथम, छोटू राम का व्यवहार अपने मुवक्किल (क्लाइंट्स) के प्रति सौहार्दपूर्ण, सहानुभूतिपूर्ण और मानवीय था. उनका उद्देश्य बहुत कम खर्चे में वकालत करके सहायता करना था. वह आर्थिक रूप से कमज़ोर, गरीब और लाचार लोगों के केस मुफ़्त में लड़ते थे.
द्वितीय, वह एक अच्छे वकील की भांति प्रत्येक केस की वकालत करते समय पूरी तैयारी के साथ उदाहरणों व सिद्धांतों पर बल देते थे.
तृतीय,वह मुकदमों में समझौता करवाने को वरीयता देते थे ताकि मुकदमों में संलिप्त पक्षों के समय व धन दोनों की बचत हो और दुश्मनी समाप्त हो और समाज में सौहार्द वातावरण बरकरार रहे.
चतुर्थ, उनका मानना था कि विवादों का निर्णय गांव ही में स्थानीय पंचायत के द्वारा किया जाए क्योंकि स्थानीय लोग पूरी तरह यह जानते हैं कि वास्तव मे मामला क्या है? स्थानीय स्तर पर गवाहों की जो अधिकांश झूठे होते हैं की भी आवश्यकता नहीं होती. परिणामस्वरूप व्यक्ति कोर्ट के अनावश्यक चक्करों, वकीलों की भारी भरकम फीस ,अन्य खर्चों से छुटकारा ही नहीं मिलता अपितु शीघ्र व सस्ता न्याय भी मिलता है.
पंचम , उन्होंने भारतीय अदालतों में अंग्रेजी जजों के बजाय भारतीयों को जज बनाने की वकालत की. उनका मानना था कि विदेशी जजों को भारत की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के बारे में पता नहीं था और न ही उन्हें स्थानीय भाषाओं का ज्ञान था. केवल यही अपितु भारतीय न्यायाधीश अंग्रेजी न्यायाधीशों के मुकाबले सस्ते भी पड़ेंगे.
छटा,सर छोटू राम का व्यवहार अपने क्लाइंटस के साथ सहानुभूतिपूर्ण और मानवीय होने के कारण अपने निवास स्थान पर पूरे सम्मान के साथ उनके खाने-पीने का प्रबंध भी करते थे तथा उनके साथ बैठकर उनके परिवारों की कुशल क्षेम पूछते और साथ बैठकर हुक्के पीते थे तथा ग्रामीण परिवेश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में ‘‘हुक्का’’ पर चर्च करते थे. यह परम्परा केवल रोहतक नहीं अपितु जारी लाहौर में भी उनके निवास स्थान पर जारी रही क्योंकि उनको मालूम था कि दूर-दराज से आने वाले लोग घर वापस नहीं जा सकते. परिणाम स्वरूप उनके घर को लोग सम्मानपूर्वक ‘छोटूराम के ढाबे’ के नाम से पुकारते थे. अन्य वकीलों के द्वारा इस प्रकार का व्यवहार अपने क्लाइंटस के साथ नहीं किया जाता था. परिणाम स्वरूप इस अतुलनीय मानवीय व्यवहार के कारण केवल उनकी वकालत में ही वृद्धि नहीं हुई अपितु जनता में भी लोकप्रियता में तेज गति से अभूतपूर्व वृद्धि होती चली गई.
सातवाँ, उन्होंने अपनी वकालत से समय निकालकर गाँवों में जाकर लोगों से मुलाकात की और गाँव के लोगों की सामाजिक और आर्थिक मुश्किलों को समझा. गाँव के लोगों से इस सीधे संपर्क से उनका सामान्य ज्ञान बढ़ा. उन्होंने यह नतीजा निकाला कि भारतीय किसानों के शोषण के मुख्य कारणों में साम्राज्यवादी सरकार की किसान-विरोधी नीतियाँ और कानून, किसानों के खिलाफ ब्रिटिश अधिकारियों और पुलिस के अत्याचार और दबाने वाला रवैया, जमींदारों, साहूकारों और सूदखोरों की शोषण करने वाली नीतियाँ, ज़मीन का लगान बढ़ाना और चीज़ों के रूप में लगान वसूलना, लगान न चुकाने पर किसानों को उनकी ज़मीन से बेदखल करना या ज़मीन ज़ब्त करना, कर्ज़ न चुकाने पर साहूकारों और सूदखोरों द्वारा गिरवी रखना या अदालती आदेश देना, चल-अचल संपत्ति, पशुधन आदि की नीलामी, पुलिस का अत्याचार, ज़मीन का लगान की दरें कानूनी सीमाओं से कहीं ज़्यादा होना, जमींदारों द्वारा लगान वसूलने की दबाने वाली नीतियाँ और तरीके, मनमानी कार्रवाई, ज़बरदस्ती वसूली, ज़बरदस्ती मज़दूरी और अकाल शामिल थे.
गांव के समाज को जगाने के लिए सर छोटू राम ने जाट संगठनों, आर्य समाज और दूसरे सामाजिक और राजनीतिक संगठनों समेत अलग-अलग पब्लिक मंचों से भाषणों और दूसरे तरीकों से लोगों में जागरूकता लाने की पूरी कोशिश की, ताकि किसानों को संगठित होने और जागरूक होने से रोकने वाली मुश्किलों को दूर किया जा सके. हालांकि, “जाट गजट” लोगों में जागरूकता फैलाने का एक ताकतवर हथियार साबित हुआ. क्योंकि इसकी कॉपियां रोहतक के ग्रामीण इलाकों में मुफ़्त में बांटी गई थीं.
संक्षेप में सर छोटू राम ने वकालत में नए आयाम जोड़े और वह अपने क्लाइंटस को ग्राहक मानते थेऔर स्वयं (वकील) को दुकानदार मानते थे.एक दुकानदार के लिए ग्राहक भगवान के समान होता है. रोहतक बार काउंसिल के विरोध के बावजूद भी उन्होंने सिविल और क्रिमिनल मामलों में अन्य वकीलों की अपेक्षा फीस आधी कर दी और गरीबों के मुकदमों की पैरवी मुफ्त करते थे.
वकालत और राजनीति में घनिष्ठ संबंध:
सर छोटू राम संबध में राजनीति और वकालत के बीच घनिष्ठ संबंध का स्पष्टीकरण अधोलिखित है:
वकालत और राजनीति के बीच करीबी रिश्ता:
सर छोटू राम के मामले में राजनीति और वकालत के बीच मज़बूत रिश्ता नीचे बताया गया है:
किसानों और पिछड़े ग्रामीण समुदायों के एक समर्पित वकील के तौर पर उनकी बढ़ती पहचान उनके राजनीतिक सफ़र में एक अहम पड़ाव बन गई. सर छोटू राम समझ गए थे कि लोगों की भलाई के लिए राजनीतिक ताकत ज़रूरी है. इस बात को समझने की वजह से वे सन् 1916 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए, जहाँ उन्होंने सन् 1917 से सन् 1920 तक रोहतक ज़िला कांग्रेस के प्रेसिडेंट के तौर पर काम किया।. हालाँकि, उन्होंने सन् 1920 में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया, क्योंकि महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले नॉन-कोऑपरेशन मूवमेंट के दौरान किसानों के मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया गया था.
नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी(सन्1923) के सह-संस्थापक के रूप में:
कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद, सर छोटू राम ने फ़ज़ल-ए-हुसैन और सर सिकंदर हयात खान के साथ मिलकर ज़मींदारा पार्टी शुरू की.सन् 1923 में, उन्होंने नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जिसे आम तौर पर यूनियनिस्ट पार्टी के नाम से जाना जाता है) बनाई, जिसमें अलग-अलग कम्युनिटी के लीडर शामिल थे: छोटू राम (हिंदू जाट), फजल-ए-हुसैन (भाटी राजपूत), सर सिकंदर हयात खान (मुल्तानी-खट्टर), और सर मलिक खिजर हयात तिवाना (जाट मुस्लिम). यूनियनिस्ट पार्टी उस समय पंजाब के सोशल और धार्मिक स्ट्रक्चर को देखते हुए बनाई गई थी, और यह साफ तौर पर सेक्युलर थी, जिसका मकसद मुस्लिम लीग का मुकाबला करना था.
सोशल और पॉलिटिकल इंजीनियरिंग के ज़रिए, पार्टी को हरियाणा इलाके के ज़्यादातर किसान कम्युनिटी से काफी सपोर्ट मिला. यूनियनिस्ट पार्टी की किसान-फ्रेंडली पॉलिसी को न सिर्फ जाटों (हरियाणा और पंजाब में हिंदू, मुस्लिम और सिख) का सपोर्ट मिला, बल्कि राजपूतों, अहीरों, कम्बोजों (मुस्लिम, हिंदू और सिख) और रोड़ (रोर) जातियों का भी सपोर्ट मिला.सन्1941 की जनगणना के अनुसार, ब्रिटिश पंजाब की आबादी में 53.2% मुस्लिम, 29.1% हिंदू, 14.5% सिख, 1.5% ईसाई और 1.3% दूसरे धर्मों के मानने वाले या किसी भी धर्म को न मानने वाले लोग थे.
पार्टी की सोच खेती-बाड़ी पर आधारित थी, जिसमें किसानों को साहूकारों और सूदखोरों जैसे शोषण करने वालों तरीकों से आज़ाद कराकर गांव के विकास को बढ़ावा देने का वादा था. सर छोटू राम ने न सिर्फ़ किसानों के अधिकारों की वकालत की, बल्कि कानूनी, आर्थिक और सामाजिक सुधारों को लागू करने के लिए एक दूसरा राजनीतिक ढांचा भी बनाया. उन्होंने शोषण करने वाले सिस्टम को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई, सिर्फ़ ब्यूरोक्रेसी पर निर्भर रहने के बजाय पॉलिसी और कानून बनाने के लिए अपनी कानूनी जानकारी का इस्तेमाल किया .यह उनके और उनके कैबिनेट साथियों के बीच एक खास फ़र्क था
कृषि और रेवेन्यू मंत्री के तौर पर, उन्होंने किसानों को शोषण से बचाने के लिए पंजाब डेब्ट रिलीफ एक्ट (1934), पंजाब डेब्टर्स प्रोटेक्शन एक्ट (1936), और मंडी कमेटी एक्ट (1940) जैसे कई अहम कानून सफलतापूर्वक पास किए. दुख की बात है कि भाखड़ा डैम प्रोजेक्ट को फाइनल करने और साइन करने के कुछ ही घंटों बाद 9 जनवरी, 1945 को उनका निधन हो गया। यह समझना ज़रूरी है कि सर छोटू राम को सिर्फ़ जाटों का मसीहा कहना उनकी बड़ी अहमियत और विरासत को कम आंकना है.
उर्दू के प्रसिद्ध शायर अल्लामा इकबाल का प्रसिद्ध शेर सर छोटूराम की संघर्षमय जीवन यात्रा पर बिल्कुल सटीक है:
“खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले,
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है”

डॉ. रामजीलाल
सामाजिक वैज्ञानिक, पूर्व प्रिंसिपल, दयाल सिंह कॉलेज, करनाल (हरियाणा, भारत)
