‘कस्बा एलम में शमशेर जयंती समारोह का आयोजन
बात बोलेगी हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही

शमशेर बहादुर सिंह’ जयंती कस्बा एलम, जिला शामली में “शमशेर बहादुर कला मंच”, “जन संस्कृति मंच और “चलचित्र अभियान” के संयुक्त प्रयास से शमशेर जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शीर्षक था — “बात बोलेगी हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही”।

कार्यक्रम को तीन सत्रों में संचालित किया गया। पहले और दूसरे सत्र का मंच संचालन एक्टिविस्ट और संस्कृतिकर्मी प्रवेंद्र ने किया ।

पहले सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि मदन कश्यप ने की।
डॉ प्रेम शंकर सिंह( युवा आलोचक प्रयागराज) ने बेहद आत्मीयता के साथ ’आधार वक्तव्य’ प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि शमशेर मार्क्सवादी विचारधारा से जुड़े एक जनपक्षधर कवि थे। उनकी कविताओं के हवाले से उन्होंने अपनी इस बात की पुष्टि की।
डॉ आशुतोष कुमार, वरिष्ठ आलोचक, संपादक और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने भी ’शमशेर बहादुर सिंह के व्यक्तित्व, उनकी किसानी पृष्ठभूमि और जीवन संघर्ष की चर्चा की और बताया कि इनकी रोशनी में शमशेर की कविताओं को समझना आसान है।

वरिष्ठ संस्कृति कर्मी अनुवादक और संगठनकर्ता दिगंबर ने शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं का किसानों–मजदूरों के जीवन और सपने के साथ जोड़ते हुए बातचीत रखी। वह मेहनतकशों के सच्चे कवि थे। आज मुजफ्फरनगरी कवि शमशेर की कविताओं को आवाम के बीच ले जाने की जरूरत है।

वरिष्ठ कवि मदन कश्यप ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि शमशेर को समझने के लिए उनकी ’शमशेरियत’ को समझना जरूरी है। किसी फ्रेम में कस कर उनको समझने का प्रयास भ्रामक है। उनकी कविताएं प्रेम, सौंदर्य, संवेदना और बदलाव आदि को खुद में समाहित किए हुए हैं, जिन्हें आज जानने समझने की बेहद जरूरत है।
दूसरे सत्र की शुरुआत में चल चित्र अभियान ने शमशेर बहादुर सिंह की कविता के वास्तविक वीडियो प्रस्तुत की, जिसे संजय जोशी ने उपलब्ध कराया। इससे श्रोताओं में ऐसा माहौल बन गया जैसे शमशेर हम सब के बीच मौजूद होकर कविता पढ़ रहे हों। आगे चलचित्र अभियान के कार्यकर्ताओं ने डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रस्तुत की जिसमें पश्चिमी यूपी के मेहनतकशों की जिंदगी को दर्शाया गया था। इनमें काली नदी के प्रदूषण से होनेवाली जानलेवा बीमारियों और कच्चे चमड़े से जूता बनानेवाले कारीगरों की कठिन जिंदगी का सजीव चित्र प्रस्तुत किया गया। चलचित्र अभियान के साथी विशाल ने अपने कामों की विस्तृत जानकारी दी
तीसरे सत्र कवि गोष्ठी का संचालन संस्कृतिकर्मी, लेखक, प्राध्यापक रामायण राम ने और अध्यक्षता वरिष्ठ कवि बल्ली सिंह चीमा ने की। कवि गोष्ठी में सर्वश्री मदन कश्यप, पराग पावन, राजेश सकलानी, रूपम मिश्र, राजेश पाल, मृत्युंजय, दिगम्बर, पूजा कुमारी, पायल भारद्वाज, अनुपम सिंह, जुबेर सैफी, प्रिंस मिश्र, परविंदर, अजीत, सुनीता शर्मा, मोहित एलम, मोनू पटियाला ने कविताओं का पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने सराहा।
कार्यक्रम में इलाहाबाद (प्रयागराज), देहरादून, सहारनपुर, रुड़की, दिल्ली, शाहदरा, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, शामली, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, और दूरदराज के गांवों के अलावा एलम कस्बा वासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की।
इस अवसर पर गार्गी प्रकाशन और नवारुण की पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रवाह सांस्कृतिक टीम, मेरठ के साथियों ने शमशेर, मुक्तिबोध, गोपाल सिंह नेपाली और शैलेन्द्र की कविताओं का गायन किया।
