राजेश भारती की हाथ पर सात कविताएं
(1)
इस हाथ से
एक पेड़ लगाना
किसी पुष्प को छूना
इस हाथ को किसी रोते हुए के कंधे पर रख कर
उसके रोने का कारण पूछ लेना।
(2)
ये हाथ दुआओं के लिए उठें
ये हाथ मेहनतकशों और बेसहारा लोगों की ढाल बनें
ये हाथ किसी बुझते चिराग़ को रौशन करें।
(3)
इस हाथ से
किसी बेबस पर गोलियाँ न चलानी पड़े
नहीं काटना पड़े
किसी का गला
ये हाथ
कभी पत्थर न उठाए
फोड़े न किसी का सिर।
(4)
ये हाथ
फूल बाँटने के काम आएँ
ये हाथ किताबें बाँटने के काम आएँ
ये हाथ किसी गिरते हुए को उठाएँ।
(5)
ये हाथ
देवताओं का आह्वान न करें
ये हाथ भाग्य के भरोसे न रहें
ये हाथ पुरुषार्थ का दामन थामें
ये हाथ स्वर्ग को ज़मीन पर ला पटकें।
(6)
ये हाथ प्रेम का ध्वज लहराएँ
ये हाथ उम्मीदों की रंगोली सजाएँ
ये हाथ गांधी की मूर्ति न तोड़ें
ये हाथ
संविधान की प्रस्तावना को न नोंचें।
(7)
ये हाथ
दोस्तों के लिए उठें
ये हाथ
प्रेमियों की रक्षा के लिए उठें
ये हाथ
वेंटिलेटर पर पड़े लोकतंत्र को बचाने के लिये उठें।
