हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-81
मेहनत-मजदूरी की मेहनत में तप कर कुंदन बने रतनलाल रोहिल्ल
सत्यपाल सिवाच
हाँसी शहर में श्रीमती लक्ष्मी देवी और श्री ओमप्रकाश के यहाँ 14 जून 1965 को एक होनहार पुत्र रतन लाल रोहिल्ला का जन्म हुआ, जिसने आगे चलकर माता-पिता का नाम ऊँचा कर दिया। रतन लाल मात्र सात साल के थे जब 1972 में पिता जी का निधन हो गया। वे तीन भाई और दो बहन हैं। मैट्रिक हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी से वर्ष 1981 में, आईटीआई से स्टेनोग्राफी में डिप्लोमा 1982 में और स्नातक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र से वर्ष 1987 मंन किया। पिता जी की मृत्यु और बड़े भाई के छोटी उम्र में संन्यास लेने से परिवार पर संकट का बोझ आ गया। बड़े भाई का भी गांव पुर जिला भिवानी स्थित आश्रम में ही 18 फरवरी 1979 को निधन हो गया था। घर में रोटी खाने के लाले पड़ गये थे। रतन लाल पढ़ाई की जिद्द पर अड़े रहे। परिवार चलाने के लिए इस कारण छोटी से उम्र में पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ चूरण बेचना शुरू किया। ढाबों पर बर्तन धोए, सिर पर हांडी रखकर गली-गली कांजी के बड़े बेचे, राज मिस्त्री के साथ बेलदारी का काम किया और नाबालिग उम्र में भी 6 दिसम्बर, 1982 तक हांसी में रिक्शा चलाया।
दिन में स्कूल में पढ़ाई करते और रात को रिक्शा चलाते थे। जब सवारी नहीं मिलती थी तो रिक्शे की गद्दी के नीचे रखी किताबों को निकाल कर स्ट्रीट लाईट में पढ़ाई कर लेते। नींद आने पर रिक्शे पर ही सो जाते थे। 7 दिसम्बर, 1982 में नौकरी की तलाश में फरीदाबाद में आ गए। 2 मई, 1988 को रोजगार कार्यालय के माध्यम से फरीदाबाद कॉम्प्लेक्स प्रशासन (अब नगर निगम) में स्टेनो के पद पर भर्ती हुए थे। इससे पूर्व जनवरी 1982 से मार्च, 1985 तक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में लिपिक के पद पर, जनवरी 1986 से लेकर जुलाई 1986 तक राजकीय महाविद्यालय फरीदाबाद में स्टेनो के पद पर और 11 जुलाई 1986 से लेकर 01 मई 1988 तक डी.ए.वी. शताब्दी महाविद्यालय फरीदाबाद में स्टेनो के पद पर कार्य किया। कुछ समय कोर्ट में भी वकीलों के साथ भी काम किया।
वह स्थापना अधिकारी (क्षेत्रीय एवं कर अधिकारी व जन संपर्क अधिकारी के पदों पर अतिरिक्त तौर से कार्यरत रहे और 15 फरवरी 2021 को स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली।
हांसी में हैफेड स्पीनिंग मिल की स्थापना हुई थी। इसके मजदूरों की हांसी में सभायें होती रहती थीं। इन सभाओं को कामरेड पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया, कामरेड रामकिशन भाटला वाले व कामरेड सतबीर सिंह संबोधित करते थे। उन दिनों रतन लाल सातवीं-आठवीं के विद्यार्थी थे और हांसी में रिक्शा भी चलाते थे। मजदूर नेताओं भाषणों को गौर से सुनते-सुनते गलत बात का विरोध करने की सीख हासिल कर ली।
एक बार स्कूल के कमरे की छत का पलस्तर गिरने पर स्कूल के छात्रों का जुलूस लेकर एस.डी.एम. कार्यालय तक पहुंच गये थे। रोहिल्ला ने बताया वे एक बार (शायद 1979) में तो दिल्ली बोट क्लब पर हुई रैली में भाग लेने के लिए वे हैफेड मिल के मजदूरों के साथ हांसी स्टेशन से रेलगाड़ी में चढ़ गए, इस ट्रेन पर रेवाड़ी में लाठीचार्ज भी हुआ था। रोहिल्ला बताते हैं – “इसी ट्रेन में कामरेड पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया भी सवार थे। इन्होंने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से बोट क्लब जाते वक्त और वापसी में भी उनकी उंगली पकड़े रखी, एक बार तो उन्हें अपने कंधे पर भी बैठा लिया था। हांसी पहुंचने पर घर तक पहुंचाया।”
कुल मिलाकर के बचपन में कामरेडों के सुने गए भाषणों का, बाल्यावस्था में की गई मजदूरी के कारण और शुरू से ही क्रांतिकारियों से संबंधित किताबों के पढ़ने के कारण उनके अंदर अन्याय का विरोध करने की भावनाएं मजबूत हुईं। वे उन्हें यूनियन के प्लेटफार्म तक ले गईं।
नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा से 14 मई 1989 को इसकी स्थापना से ही जुड़ गए थे। इन्होंने बतौर प्रेस सचिव और महासचिव के रूप में लंबे समय तक काम किया। लगातार 2003 से 2008 तक सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की केन्द्रीय कमेटी के सदस्य भी रहे। नगर निगम कार्यालय कर्मचारी यूनियन के महासचिव और म्युनिसिपल कारपोरेशन इम्प्लाइज फेडरेशन के संस्थापक महासचिव के तौर पर काम किया।
रतन लाल रोहिल्ला ने नौकरी में आने से सेवानिवृत्ति तक लगातार सभी संघर्षों में भाग लिया और बहुत बार नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। दिनांक 02 अप्रैल 1991 से लेकर 15 अप्रैल 1991 की राज्यव्यापी हड़ताल को फरीदाबाद में नेतृत्व प्रदान किया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के सक्रिय सहयोग के कारण यह हड़ताल सफल रही और राज्यपाल धनिक लाल मंडल के साथ केवल पेंशन लागू करने की एक सूत्री मांग मंजूर हुई।
यह हड़ताल इस दृष्टिकोण से अत्यधिक ऐतिहासिक मानी जाती है कि देश में लोकल बॉडी के कर्मचारियों को पहली बार हरियाणा प्रदेश में पेंशन देने की मांग मानने को सरकार को एकजुट आंदोलन के आगे झुकने पर मजबूर होना पड़ा।
हरियाणा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की वर्ष 1993 की हड़ताल और नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा की 1996-97 में हुई हड़ताल के कारण दो बार बर्खास्त हुए। दो बार निलंबित किया गया, 5-6 बार चार्जशीट किया गया। एक बार वर्ष 1997 में नर्सों की हड़ताल के दौरान जंतर-मंतर पर पुलिस लाठीचार्ज में चोट लगी और एक बार फरीदाबाद में मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन के दौरान एक थानेदार के द्वारा महिला सफाई कर्मचारी को थप्पड़ मारने पर रोहिल्ला ने थानेदार को वैसा ही जबाब दिया। इसके बाद थाने में ले जाकर उनको बुरी तरह से यातनायें दी गईं। सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान गोपी की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के परिणामस्वरूप लगाए गए जाम के कारण संगीन धाराओं में दर्ज किये गये मुकदमे में 10 साल तक कोर्ट की पेशियां भुगतीं और इसके बाद इस मुकदमे में गुणदोष के आधार वे दोषमुक्त हुए। रतन लाल रोहिल्ला स्वभाव से ही अन्याय के विरुद्ध अड़ जाते हैं।
भाजपा के मंत्री विपुल गोयल की गैरकानूनी बात न मानने के कारण उनका स्थानान्तरण एक कनिष्ठ पद पर यमुनानगर कर दिया गया। इसे स्वीकार करने के बजाय इसके विरोध में और नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में सत्याग्रह शुरू कर दिया। उन पर राजद्रोह लगाने की असफल कोशिश की गई और अनेक तरह से उत्पीड़न किया गया। माननीय पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा सरकार की सभी कार्रवाइयों को निरस्त करने के बाद मंत्री को मुंह की खानी पड़ी।
इसके बाद इन लोगों ने डयूटी टाम पर उन पर जानलेवा हमला करवाया। क्योंकि हमला एक गरीब कर्मचारी से उसे धोखे में रखकर करवाया गया था, इसलिये नौकरी से बर्खास्त कर दिये गये। इस कर्मचारी को रोहिल्ला ने अपील में बहाल करवा दिया। इससे कुछ समय पूर्व उन पर सेक्सुएल ह्रासमेंट के आरोप तक लगवा दिये गये। राष्ट्रीय महिला आयोग, पुलिस विभाग, मजिस्ट्रेट जांच और इंटरनल कम्प्लेंट कमेटी आदि आदि 18 तरह की जांच का सामना करना पड़ा और सभी जांचों में बरी हुए। बाद में झूठा आरोप लगाने वाली महिला व इसके गवाह माननीय उच्च न्यायालय में चले गये। दस साल तक चले मुकदमे में भी विरोधियों को मुंह की खानी पड़ी। उक्त महिला को तो मेजर विभागीय सजा मिल चुकी है और गवाहों के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा डालने के लिए कानूनी राय ले रहे हूँ। सभी तरह का उत्पीड़न सरकारों से समझौते के बाद निरस्त होते रहे हैं।
वैचारिक तौर से तो ताकत मिली
वे कहते हैं कि संघ की कर्मचारियों के काम करवाने के लिए चापलूसी के बजाय कानून व नियमों और तर्कों के आधार पर अग्रेसिव तरीके से इन्कलाब का रास्ता पकड़ा जिसके परिणामस्वरूप न केवल फरीदाबाद से संबंधित सतापक्ष व विपक्षी सभी राजनेता उनको अच्छे से जानते थे। अनेक आई ए एस अधिकारी उन्हें अच्छे से जानते हैं। एक बार नगर निगम फरीदाबाद में कार्यरत एक आई ए एस अधिकारी अभिलक्ष लिखी से इतना टकराव हो गया था कि प्रशासन को पूरे नगर निगम क्षेत्र में धारा 144 लगानी पड़ी। रतन लाल को निलंबित कर दिया गया, राज्य की आई ए एस एसोसिएशन तक उनके विरुद्ध खड़ी हो गई।
सर्वकर्मचारी संघ व नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के हस्तक्षेप के बाद सरकार न केवल पीछे हटने पर मजबूर हुई बल्कि उनके विरुद्ध की गई उत्पीड़न की कार्यवाही भी निरस्त करनी पड़ी। किसी नेता या अधिकारी से निजी काम नहीं पड़ा।
इसके अलावा रतन लाल ने अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के वर्ष 1999 में मुम्बई में, 2002 में चेन्नई में, 2005 में कलकता में हुए अधिवेशनों में भाग लिया और पटना व विजयवाड़ा में हुई मिनी सम्मेलनों में भी भाग लिया। वे एक संस्मरण बता रहे हैं। नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा की वर्ष 1996-97 की हड़ताल के दौरान उनकी पत्नी व बेटा फरीदाबाद स्थित सरकारी मकान में रहते थे। वह रोहतक जेल में थे। चार साल का बेटा अत्यधिक बीमार अवस्था में अस्पताल में दाखिल था। धर्मपत्नी बिल्कुल भी नहीं घबराईं। दो चार दिन के बाद रतन लाल की फरीदाबाद अदालत में पेशी थी, हौसला अफजाई के लिए बल्लभगढ़ के साथी तो नारेबाजी कर ही रहे थे उनकी पत्नी व चार साल का बेटा भी उनके साथ नारे लगा रहे थे।
उनका मानना है कि नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा को इकाई स्तर से राज्य स्तर पर सांगठनिक, संघर्ष व वैचारिक तौर से तो ताकत मिली, संघ की प्रगतिशील विचारधारा का सकारात्मक असर नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के कार्यकर्ताओं में साफ नजर आ रहा है, लेकिन अभी भी बहुत अधिक सुधार की आवश्यकता है। फरीदाबाद नगर निगम में हुए आपसी सांगठनिक विवादों को वरिष्ठ नेताओं को बीच में लेकर निपटाना चाहिये था। उनसे कनिष्ठ पदाधिकारी के साथ हुए इस विवाद के कारण संगठन जो दोफाड़ हुआ उसके लिए वरिष्ठ पदाधिकारी होने के नाते उन्होंने आत्मालोचना की है, लेकिन यह भी सुनिश्चित किया है कि इसके कारण सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा व नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के आंदोलन को फरीदाबाद में किसी भी प्रकार का नुकसान न हो।
उनका सुझाव है कि संगठन में काम करने वाले नेताओं को पूर्ण रूप से ईमानदार, चरित्रवान व निडर होना चाहिये और भ्रष्टाचार में न तो खुद संलिप्त हों और यूनियन के दम पर भ्रष्टाचार करने वालों को यूनियन से खदेड़ देना चाहिए। आरामपरस्त जिंदगी से बचना चाहिए और फील्ड दौरे के दौरान होटलों आदि में ठहरने के बजाय स्थानीय साथियों के घर पर ही रुकना चाहिए। वे कहते हैं कि इस दौरान आचरण उच्च कोटि का होना चाहिए यानी नशे आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
कर्मचारी नेताओं को ट्रेड यूनियन से संबधित साहित्य, विभागीय सेवा नियमों का अध्ययन करना चाहिए और संघर्ष के रास्ते से कभी भी पीछे हटने का प्रयास नही करना चाहिए। वे कहते हैं कि संगठनों में काम करने वाले साथियों व आम कर्मचारियों व जनता को भाजपा व संघ से जुड़े लोगों से सचेत करने की आवश्यकता है क्योंकि ये साम्प्रदायिक ताकतें हमारी सदैव दुश्मन रही हैं और रहेंगी। पहले संगठन का प्रभाव था। आज ऐसा नहीं है, हरेक इकाई में जा-जाकर के कर्मचारियों से व्यक्तिगत तालमेल करने के बजाय फोन या वाट्सएप आदि के जरिये नीचे के कार्यकर्ताओं से तालमेल करने, मित्र संगठनों से संघर्षों में तालमेल न करने, ट्रेड यूनियन साहित्य का अध्ययन न करने, भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल होने, स्थानीय स्तर पर निजी स्वार्थवश राजनेताओं व अधिकारियों से नजदीकी बढाने व निजी काम करवाने, पदाधिकारियों के द्वारा स्वयं यूनियन के संघर्ष संबधित फैसले लागू न करने के कारण आज के आन्दोलनों की धार खंडित हो गई।
रतन लाल के प्रयास से नगर निगम फरीदाबाद में रिटायरमेंट के दिन ही पेंशन व अन्य लाभ मिलने शुरू हुए। यह प्रक्रिया 2 साल तक लगातार चलती रही। अब बंद हो गई है। वे बताते हैं कि वह अब भी नगर निगम फरीदाबाद के सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए रिटायर्ड कर्मचारी संघ के साथियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैम। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान गुरुद्वारा, राधास्वामी सत्संग और कुछ समाजसेवी संस्थाओं से जुड़कर मजदूर बस्तियों में भोजन, जरूरत का सामान व दवाइयां आदि पहुंचाने में मदद की। तत्कालीन उपायुक्त यश गर्ग जी ने भी इस कार्य में सहयोग दिया। रिटायरमेंट से पहले वे यूनियन के बैनर तले रक्तदान शिविर लगाते रहे। वे 37 बार रक्तदान कर चुके हैं।
रतन लाल रोहिल्ला का विवाह 25 जून 1987 को सरिता के साथ हुआ। दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी ने महर्षि दयानंनद विश्वविद्यालय, रोहतक से स्नातकोतर (अर्थशास्त्र) में किया है जो कि विवाहित है और सुखपूर्ण व खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही है। छोटा बेटा है जिसने बी०ए० प्रथम तक शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद अपने आप नगर निगम फरीदाबाद में अस्थाई रूप से लिपिक के रूप में भर्ती हो गया और अब भी आउटसोर्सिंग लिपिक के रूप में वहीं पर कार्यरत है। विवाहित है, सुखी व खुशहाल है। (सौजन्य: ओमसिंह अशफाक)

लेखक: सत्यपाल सिवाच
