रणबीर सिंह दहिया की हरियाणवी रागनी- दो सखियों की बातचीत

दो सखियाँ हैं । चांदकौर का दो साल पहले ब्याह हो जाता है । वह जब अपने पीहर आती है तो उसे पता चलता है कि कमला और युद्धबीर जो दूसरी जात से है और उसके कालेज में पढता है ,शादी करना चाहते हैं । एक रोज दोनों सखियाँ मिलती हैं । चाँदकौर कमला से पूछती है कि क्या सुन रही हूँ । दोनों के सवाल जवाब होते हैं :- रणबीर दहिया

हरियाणवी रागनी

दो सखियों की बातचीत

रणबीर सिंह दहिया

 

चाँ- कमला सुणले बात मेरी मतना रोपै चाला हे।।

क:एक बै जो मन धार लिया  कोन्या होवै टाला हे।।

1

चाँ: म्हारे बरगी छोरी नै ना वर आपै टोहना चाहिए

क:गलत रीत बात पुराणी ना इनका मोह होना चाहिए

चाँ: अपनी जात कुटम्ब कबिला ना कदे नाम डबोना चाहिए

क:जातपात का झूठा रोला दिल का बढ़िया होना चाहिए

चाँ:के टोहया तनै छैल गाभरू रंगका दीखै काला हे।।

क:रूप रंग मैं के धरया सै इंसान गजब निराला हे ।।

2

चाँ:नकशक रूप रंग पै तो या दुनिया मरतीआई सै

क:बिना विचार मिलें तो फेर कोन्या भरती खाई सै

चाँ: मात पिता वर टोहवैं या दुनिया करती आई सै

क: डांगर ज्यूँ खूंटै बांधैं जणो गऊ चरती पाई सै

चाँ:बात मानले कमला बेबे टोहले बीच बिचाला हे।।

क: उंच नीच देख लई सै बदलूँ कोन्या पाला हे ।।

3

चाँ: यो तेरा भूत प्रेम का थोड़े दिन मैं उतर ज्यागा

क: एक सै मंजिल म्हारी क्योकर प्यार बिखर ज्यागा

चाँ: बख्त की मार पड़ैगी हे वो तनै छोड़ डिगर ज्यागा

क:बख्त गैल लडां मिलकै संघर्ष मैं प्रेम निखर ज्यागा

चाँ: जानबूझ कै मतना करै जिंदगानी का गाला हे।।

क: वो मनै चाहवै सै मैं फेरूं उसकी माला हे ।।

4

चाँ: गाम गुहांड घर थारे नै जात बाहर करैगा हे

क: बढ़िया बात नै रोकै वो गल्त विचार मरैगा हे

चाँ: घर बार बिना ना तमनै दिन चार सरैगा हे

क: गादड़ की मौत मरै जो एक बार डरैगा हे

चाँ:कमला तूँ फेर पछतावैगी थारा पिटै दिवाला हे

क: चाँदकौर क्यों घबरावै सै रणबीर म्हारा रूखाला हे

जुलाई 1989

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