रणबीर दहिया की हरियाणवी रागनी- लाल बहादुर शास्त्री

लाल बहादुर शास्त्री जी को याद करते हुए

रणबीर दहिया की हरियाणवी रागनी- लाल बहादुर शास्त्री

 

लाल बहादुर शास्त्री का कद छोटा उंचा घणा बिचार था।।

जय जवान जय किसान का नारा लाया घणा दमदार था।।

 

1

दुनिया मैं या उत्थल पुथल चारों कान्ही माच रही थी

गुलाम देशां मैं अंग्रेजी सेना खेल नंगा नाच रही थी

गरीब जनता की साथ मैं या कर खींचम ख़ाँच रही थी

लाल बहादुर नै जन्म लिया साल उन्नीस सौ पांच रही थी

शारदा प्रसाद बाप टीचर था सादा गरीब परिवार था।।

जय जवान जय किसान का नारा लाया घणा दमदार था।।

2

डेढ़ साल का जमा बालक याणा पिता स्वर्ग सिधार गये

छोटे से बालक उपर जिम्मेदारी परिवार की ये डार गये

चाचा के कहने पै वाराणसी मैं पढ़ खातर पधार गये

मिश्रा जी मिले शहर मैं उनके हो पक्के मददगार गये

आजादी की जंग का मिश्रा नै खाका बताया बारम्बार था।।

जय जवान जय किसान का नारा लाया घणा दमदार था।।

3

लाल बहादुर शास्त्री जी कै आजादी का जनून चढ़या

महात्मा गांधी जी पै उननै असहयोग का पाठ पढ़या

जिब बायकॉट की बात चली शास्त्री सबतै आगै कढ़या

मिश्रा और चाचा नाराज हुये लाल पै गुस्सा खूब बढ़या

माता ललिता देवी नै साथ दिया जताया अपना प्यार था।।

जय जवान जय किसान का नारा लाया घणा दमदार था।।

4

लाहौर सैसन कांग्रेस का शास्त्री अटैंड करकै आया

पूर्ण स्वराज का नारा लाकै जंग का गया बिगुल बजाया

आजादी पाछै जनता का मंत्री पद पै साथ निभाया

नेहरू बाद प्रधानमंत्री बने देश आगै बढ़ाना चाहया

कहै रणबीर बरोने आला वो माणस घणा होनहार था।।

जय जवान जय किसान का नारा लाया घणा दमदार था।।

कवि- रणबीर दहिया

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