रामेश्वर दयाल शर्मा – दक्षिण हरियाणा के सक्रिय नेता

हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-84

रामेश्वर दयाल शर्मा – दक्षिण हरियाणा के सक्रिय नेता

सत्यपाल सिवाच

रामेश्वर दयाल का जन्म 07.01.1947 को महेन्द्रगढ़ जिले के गांव गागड़वास में श्री बुधराम शर्मा नम्बरदार और श्रीमती भगवानी देवी के घर हुआ। वे तीन भाई और दो बहनें हैं। उन्होंने दसवीं व इंटरमीडिएट के बाद जे.बी.टी. प्रशिक्षण लिया । वे सन् 1968 में वन रक्षक पद पर भर्ती हुए। वे फारेस्टर पद पर पदोन्नत हुए। बाद में कोर्ट केस के जरिए 1978 में वन दरोगा और 1987 डिप्टी फारेस्ट रेंजर बनाए गए। वे सन् 2005 में सेवानिवृत्त हो गए।

वे अपने सेवाकाल में वन कर्मचारी संघ हरियाणा में सक्रिय रहे और विभिन्न पदों पर काम किया। लम्बे समय तक इसके जिला सचिव पर सक्रिय रहे। इसके अलावा सर्वकर्मचारी संघ में जिला रेवाड़ी के कोषाध्यक्ष और जिला सचिव पद पर काम किया। उन्होंने सन् 1986-87, 1991, 1993, 1996-97 और 1998 के आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। वे इनमें जेल भी गए और निलंबन सहित कई तरह का उत्पीड़न झेला। सन् 1987 में जेल भरो आह्वान पर चण्डीगढ़ की बुड़ेल जेल में रहे। बाद में 1993 में भी जेल में रहे।

उनका मानना है कि नौकरशाही की मनमानी पर रोक लगाने में यूनियन की भूमिका प्रशंसनीय रही है। कुछ दोगले और स्वार्थी तत्वों के कारण उन्हें गलत आरोपों पर अढ़ाई साल निलंबित रखा गया। वे हमेशा न्याय के लिए लड़ते रहे हैं।

सेवानिवृत्त होने के बाद वे अनेक सामाजिक गतिविधियों में भाग लेते हैं। पिछड़ा वर्ग के हित के लिए सक्रिय हैं और जांगिड़ ब्राह्मण कल्याण सभा में भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा वे रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा की गतिविधियों में भी भाग लेते हैं। (सौजन्य: ओमसिंह अशफ़ाक)

लेखक: सत्यपाल सिवाच

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