सामाजिक समरसता के लिए सभी तबकों के नज़रिए में सकारात्मक बदलाव जरूरी: अशोक कुमार गर्ग

सामाजिक समरसता के लिए सभी तबकों के नज़रिए में सकारात्मक बदलाव जरूरी: अशोक कुमार गर्ग

‘ज़हर जो हमने पीया’ पुस्तक पर हुई चर्चा – परिचर्चा

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव सरीखे क्रांतिवीरों के सपनों का एक आदर्श, स्वस्थ एवं समतापरक समाज सृजन हेतु सभी तबकों द्वारा एक दूसरे के प्रति अपने नज़रिए में सकारात्मक बदलाव अनिवार्य है।

यह विचार नगर निगम, हिसार के पूर्व कमिश्नर अशोक कुमार गर्ग, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ने प्रगतिशील लेखक संघ, सिरसा की ओर से जीएनसी सिरसा के मल्टीपर्पज़ हॉल में ‘ज़हर जो हमने पीया’ पुस्तक पर आयोजित ‘चर्चा-परिचर्चा’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के तौर पर अपने संबोधन में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में वे महिलाएं जो दलित हैं, सफाईकर्मी हैं और ग़रीब हैं, सर्वाधिक शोषण की शिकार हैं। उन्होंने कहा कि समाज के इस हाशियाकृत तबके को न्याय तभी संभव हो सकता है यदि सभी जन अपने सामाजिक पारिवारिक आयोजनों में इन्हें बराबरी के आधार पर आमंत्रित करें। सफाईकर्मी महिलाओं की समाज में सम्मानजनक स्वीकार्यता तभी संभव बन पाएगी यदि इनके साथ हर नागरिक की तरह बराबरी, स्नेह और इंसानियत के नज़रिए से गरिमामयी व्यवहार प्रदर्शित किया जाए।

महिला सफाईकर्मियों की आप बीती पर आधारित और अशोक कुमार गर्ग, मनोज छाबड़ा व राजकुमार जांगड़ा द्वारा संपादित पुस्तक ‘ज़हर जो हमने पीया’ पर आयोजित इस ‘चर्चा-परिचर्चा’ कार्यक्रम की अध्यक्षता जीएनसी सिरसा के प्राचार्य डॉ. शत्रुजीत सिंह, प्रलेस सिरसा के अध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत सिंह सिंधरा, राजकुमार जांगड़ा, वैष्णवी, निशा, अनीता व चंचल रानी एडवोकेट पर आधारित अध्यक्षमंडल ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ महक भारती द्वारा सामाजिक सरोकारों से सराबोर एक भावपूर्ण गीत की ख़ूबसूरत प्रस्तुति से हुआ। मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, अन्य अतिथिगण एवं सभी उपस्थितजन का स्वागत करते हुए प्रलेस हरियाणा के उपाध्यक्ष परमानंद शास्त्री ने मुख्य अतिथि अशोक कुमार गर्ग द्वारा सिरसा के उपायुक्त के तौर पर उनकी नायाब कार्यशैली की तारीफ़ करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को उदाहरणीय एवं अनुकरणीय बताया।

इकतालीस महिलाकर्मियों के आत्म कथ्यों पर आधारित पुस्तक ‘ज़हर जो पीया हमने’ की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुए प्रलेस राष्ट्रीय सचिवमंडल सदस्य एवं हरियाणा इकाई के महासचिव डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह पुस्तक हिंदी दलित साहित्य की एक श्रेष्ठ कृति होने के साथ एक साहित्यिक एवं ऐतिहसिक दस्तावेज भी है।

अशोक कुमार गर्ग द्वारा प्रस्तुत विस्तृत व्याख्यान के उपरान्त आयोजित परिचर्चा में भाग लेते हुए प्रलेस राष्ट्रीय अध्यक्षमंडल के सदस्य कॉ. स्वर्ण सिंह विर्क, कॉ. राज कुमार शेखूपुरिया, प्रो. हरभगवान चावला, डॉ. प्रेम कंबोज, पद्मश्री भाई गुरविंदर सिंह, बलबीर कौर गाँधी, चिमन भारतीय, कृष्ण कायत, वीर सिंह, सतपाल छापरवाल, डॉ. रेखा रानी, वैष्णवी, मनजीत, अनीता, कृष्णा इत्यादि ने कहा कि इस पुस्तक का पाठ करने के उपरान्त व्यक्ति वैसा नहीं रहता जैसा इसके पाठ से पहले होता है। उन्होंने कहा कि अपने नज़रिए में सकारात्मक बदलाव हेतु इस पुस्तक का गंभीर पाठ अनिवार्य है। इस अवसर पर उपस्थितजन द्वारा पूछे गए प्रश्नों के स्पष्ट एवं सटीक उत्तर देते हुए अशोक कुमार गर्ग ने उनकी जिज्ञासा की आपूर्ति की।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. शत्रुजीत सिंह ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि ऐसे सार्थक आयोजनों की निरंतरता सदैव बनी रहनी चाहिए। उन्होंने इस अति-महत्वपूर्ण पुस्तक के रूबरू करवाने हेतु अशोक कुमार गर्ग के प्रति विशेष साधुवाद व्यक्त किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रलेस सिरसा के अध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत सिंह सिंधरा ने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, अन्य अतिथिगण व सभी उपस्थितजन के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा ने किया। कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. हरविंदर सिंह सिरसा ने साहिर लुधियानवी की एक कविता के ज़रिए वैश्विक अमन पसंद ताक़तों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए साम्राज्यवादी ताक़तों द्वारा जारी जंगों को तुरंत रोके जाने की अपील की।

कार्यक्रम में अजमेर सिंह, डॉ. बूटा सिंह विर्क, हरजिंदर सिंह भंगू, सुखराज सिंह सिद्धू, डॉ. यज्ञदत्त वर्मा, रमेश शास्त्री, बूटा सिंह, डॉ. शेर चंद, अनीश कुमार, सुशील पुरी, पुरषोत्तम शास्त्री, नवनीत रेणू, सुनील कुमार, डॉ. मोनिका गोयल, संदीप कौर, सुनीता रानी, डॉ. जैस्मीन, शीला रानी विनायक, मनोरमा, स्वाति, मुस्कान, सिमरन, ईशनजोत, परवीन, राजो, ऊषा रानी, शिमला, निशा, प्रेम लता, अंती देवी, वीरो देवी, तमन्ना, मंजू, किरण कौर, राज रानी, संतोष, कवलजीत कौर, मिंटू देवी, सुमन, निर्मला, कृपाशंकर त्रिपाठी, प्रो. राजेंद्र भंवरिया, प्रो. गुरसाहिब सिंह सिद्धू, सुरेश बरनवाल, दर्शन लाल, हरीश सेठी झिलमिल, हरजीत सिंह, ललित सोलंकी, हमजिंदर सिंह, कुलवंत सिंह, विमल मौसूण, मनोज बेदी एडवोकेट, डॉ. सुखदेव सिंह ढिल्लों, हरदेव सिंह धंजल, अशोक कंसल, रघुबीर सिंगला, महेश बोस पंकज, राजेंद्र ढाबां, डॉ. कपिल कुमार, बलदेव कुमार, राज कुमार, विशाल वत्स, हिमायत, हरमनदीप इत्यादि सहित सिरसा, हिसार व आप पास के इलाकों से विशाल संख्या में सम्मान्यजन ने अपनी सक्रिय एवं गरिमामयी उपस्थिति दर्ज़ करवाई।

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