कवियों ने कहा, साहित्य का दायित्व जनता के सच को सामने लाना

कवियों ने कहा, साहित्य का दायित्व जनता के सच को सामने लाना

जनवादी लेखक संघ, हिसार की मासिक गोष्ठी में कवियों ने किया काव्य पाठ

 

हिसार। जनवादी लेखक संघ,हिसार की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन टाउन पार्क हिसार में सोमवार को किया गया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता मास्टर रामकुमार तंवर ने की और संचालन मास्टर कृष्ण कुमार इंदौरा ने किया।

काव्यपाठ करते हुए रचनाकारों ने साफ़ शब्दों में कहा कि आज के दौर में साहित्य का दायित्व सत्ता-सरोकारों की भाषा बोलना नहीं, बल्कि जनता के सच को सामने लाना है। गोष्ठी जनवादी चेतना, प्रतिरोध और वैचारिक प्रतिबद्धता का सशक्त मंच बनी।

कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मेहनतकश वर्ग की पीड़ा, किसान-मज़दूर के संघर्ष, बढ़ती असमानता, सांप्रदायिकता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे हमलों को बेनकाब किया। प्रस्तुत कविताएँ केवल भावुक अभिव्यक्ति नहीं थीं, बल्कि शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ वैचारिक हस्तक्षेप थीं।

वक्ताओं ने कहा कि जनवादी लेखक संघ की परंपरा सत्ता के साथ खड़े होने की नहीं, बल्कि सच के साथ खड़े होने की है। जब मीडिया और संस्थाएँ जनविरोधी नीतियों पर मौन हैं, तब साहित्य को प्रतिरोध की भूमिका निभानी होगी।

गोष्ठी में इस बात पर भी जोर दिया गया कि लेखक की कलम तब तक सार्थक नहीं हो सकती, जब तक वह समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े इंसान के पक्ष में नहीं उठती। काव्य गोष्ठी में निर्णय लिया गया कि आने वाले समय में जनवादी लेखक संघ, हिसार जनता के सवालों को केंद्र में रखते हुए वैचारिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों को और तेज करेगा।

काव्य गोष्ठी में मास्टर सतीश कंवारी,ऋषि सक्सेना, मास्टर रामकुमार तंवर,वरिष्ठ साहित्यकार भीम सिंह हुड्डा, मास्टर कृष्ण कुमार इंदौरा, सरदानंद राजली, खुशी राजली,महिर बुगालिया आदि रचनाकार शामिल रहे।

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