हर गलती बोझ नहीं होती-कुछ रास्ता दिखाने आती हैं

हर गलती बोझ नहीं होती-कुछ रास्ता दिखाने आती हैं

डॉ रीटा अरोड़ा

 

कभी ठहरकर सोचिए-क्या आप भी अपनी गलतियों से सीखते हैं या उन्हें ढोते रहते हैं?

हर गलती के बाद ज़िंदगी हमें एक मौका देती है-सीखने का या फिर उसी जगह अटक जाने का।

और ज़्यादातर लोग दूसरा रास्ता चुन लेते हैं।

ज़िंदगी सीधी रेखा नहीं है। इसमें मोड़ हैं, ठोकरें हैं‌ और ऐसे फैसले हैं जो हमें पीछे धकेलते हुए लगते हैं। लेकिन सच यह है कि जीवन का अर्थ ही है-लगातार प्रयोग करना। हर फैसला एक कोशिश है और हर गलती एक संकेत।

समस्या गलती में नहीं होती, बल्कि उस नजरिए में होती है जिससे हम उसे देखते हैं। जब कुछ गलत होता है तो हम या तो खुद को दोष देते रहते हैं या परिस्थितियों को। लेकिन एक तीसरा रास्ता भी है-रुककर समझना कि यह अनुभव हमें क्या सिखा रहा है।

गलती समस्या नहीं होती, उसे समझने से इंकार समस्या बन जाता है।

और यही फर्क तय करता है कि हम आगे बढ़ेंगे या वहीं रुक जाएंगे।

मान लीजिए आपने किसी पर भरोसा किया और वह टूट गया। यह सिर्फ दर्द नहीं है-यह संकेत है कि आगे किस तरह और किस पर भरोसा करना है।

इसी तरह, एक गलत निर्णय आपको गिरा सकता है, लेकिन वही आपको अगली बार ज्यादा सजग भी बनाता है।

असल बात यह है कि ज़िंदगी हमें रोकती नहीं, हम खुद रुक जाते हैं।

गलतियों को बोझ बना लेंगे तो वे हमें नीचे खींचेंगी।

उन्हें अनुभव बना लेंगे तो वही हमें आगे बढ़ाएँगी।

असफलता रास्ता बंद नहीं करती, वह दिशा बदलने का संकेत देती है।

अंत में बात बहुत साफ है- ज़िंदगी एक ही है‌ और इसमें हर गिरावट एक अवसर है। इसलिए ठोकरों से डरिए मत, उनसे सीखिए। हर गिरावट के बाद खुद से एक ही सवाल पूछिए- *“मैंने क्या खोया नहीं, मैंने क्या सीखा?”*

क्योंकि आगे बढ़ने वाले वही होते हैं, जो गलती को बोझ नहीं, दिशा बना लेते हैं।

 

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